सत्यनारायण कथा में हर पात्र वही भोगता है जो उसने वचन दिया और तोड़ा। कथा कहती है — सत्य ही नारायण है। इसीलिए यह पूजा किसी माँग से नहीं, वचन निभाने के संकल्प से की जाती है।
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ॐ नमो नारायणाय
आरती: जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: चंद्र-अर्घ्य के बाद प्रसाद लेकर पारण करें। प्रसाद कम से कम पाँच घरों में बाँटें।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।