कार्ड 01 / 24

एकादशी

भगवान विष्णु
हर मास दो बार — शुक्ल व कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि

अगला एकादशी कब है

कथा

राजा अम्बरीष ने एकादशी का व्रत निष्ठा से किया। दुर्वासा ऋषि के क्रोध से उन्हें बचाने स्वयं सुदर्शन चक्र आया। तब से यह तिथि विष्णु को सबसे प्रिय है — इसमें अन्न नहीं, संयम का भोग लगता है।

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मंत्र · 108 बार

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

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आरती: ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

तुलसी पत्रपीले फूलपीला वस्त्रपंचामृतकेला व नारियलचंदन व अक्षतदीप व धूपगुड़ या खीर

व्रत में आहार

खाएं
  • फल व फलाहार
  • दूध, दही, मेवा
  • साबूदाना, सिंघाड़ा
  • सेंधा नमक
न खाएं
  • अन्न, चावल, दाल
  • लहसुन व प्याज़
  • साधारण नमक
  • मसूर व बैंगन

पारण: द्वादशी के भीतर, सूर्योदय बाद। पहले तुलसी-जल, फिर अन्न।

तुलसी रानी की सलाह

मेरे बिना विष्णु-भोग अधूरा है — पर आज मुझे तोड़ना मना है। एक दिन पहले पत्ते तोड़कर जल में रख लो, वे ताज़े रहेंगे।

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।