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शीतला अष्टमी

शीतला माता
चैत्र कृष्ण अष्टमी — होली के बाद, बसोड़ा भी कहते हैं

अगला शीतला अष्टमी कब है

कथा

शीतला माता शीतलता की देवी हैं — ज्वर और फोड़े-फुंसी से रक्षा करने वाली। इस दिन चूल्हा नहीं जलता; एक दिन पहले बना ठंडा भोजन ही माता को चढ़ता है और घर में खाया जाता है।

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मंत्र · 108 बार

ॐ ह्रीं शीतलायै नमः

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आरती: जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

सप्तमी का बना भोजनदही व राबड़ीठंडी पूरी-सब्ज़ीमीठे चावलजल का लोटारोली-अक्षतमेहंदीदीप (बिना अग्नि प्रयोग)

व्रत में आहार

खाएं
  • बासी पूरी-सब्ज़ी
  • दही व राबड़ी
  • मीठे चावल
  • ठंडा जल
न खाएं
  • ताज़ा पका भोजन
  • चूल्हा जलाना
  • गरम भोजन
  • मांस-मदिरा

पारण: पूजा के बाद वही ठंडा भोजन परिवार सहित लें। भोजन से दुर्गंध आ रही हो तो न खाएँ।

दादी की सलाह

बासी भोजन पूरे साल में सिर्फ़ आज चलता है, और वह भी तभी जब रात ठंडी रही हो। ज़रा भी खट्टी गंध आए तो मत खाओ — माता भी यही कहेंगी।

सेट पूर्ण

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।