अमावस्या पितरों के स्मरण का दिन है। मान्यता है कि इस तिथि पर पूर्वज अपने वंश के जल और अन्न की प्रतीक्षा करते हैं। जो दिया जाता है वह उन तक पहुँचता है — और जो याद रखा जाता है, वह घर में रहता है।
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ॐ पितृभ्यः नमः
आरती: ॐ जय जगदीश हरे — धीमी लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: व्रत ऐच्छिक है — एक समय सात्विक भोजन उत्तम। पहले पितरों का भाग निकालें।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।