कार्ड 09 / 24

अमावस्या

पितृ व भगवान विष्णु
हर मास की अंतिम तिथि — चंद्रमा अदृश्य रहते हैं

अगला अमावस्या कब है

कथा

अमावस्या पितरों के स्मरण का दिन है। मान्यता है कि इस तिथि पर पूर्वज अपने वंश के जल और अन्न की प्रतीक्षा करते हैं। जो दिया जाता है वह उन तक पहुँचता है — और जो याद रखा जाता है, वह घर में रहता है।

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मंत्र · 108 बार

ॐ पितृभ्यः नमः

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आरती: ॐ जय जगदीश हरे — धीमी लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

काले तिलजल-पात्रकुशदान हेतु अन्नसफेद फूलदीपकधूपगुड़

व्रत में आहार

खाएं
  • सात्विक भोजन
  • खीर
  • फल
  • दूध
न खाएं
  • लहसुन-प्याज़
  • मांस-मदिरा
  • बासी भोजन
  • नया कार्यारंभ

पारण: व्रत ऐच्छिक है — एक समय सात्विक भोजन उत्तम। पहले पितरों का भाग निकालें।

जौ जी की सलाह

तर्पण का जल ठंडा और काले तिल मिलाकर दो। और उस दिन जो अन्न दान करो, वही घर में भी पकाओ — बाँटने और खाने में फ़र्क़ मत रखो।

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।