संकष्टी का अर्थ है संकट हरने वाली। गणेश जी ने इसी तिथि पर भक्तों को वचन दिया कि जो चंद्रोदय तक व्रत रखकर उन्हें दूर्वा अर्पित करेगा, उसका विघ्न वे स्वयं उठा लेंगे।
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ॐ गं गणपतये नमः
आरती: जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही पारण करें — चंद्रदर्शन के बिना व्रत अधूरा है।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।