राजा अम्बरीष ने एकादशी का व्रत निष्ठा से किया। दुर्वासा ऋषि के क्रोध से उन्हें बचाने स्वयं सुदर्शन चक्र आया। तब से यह तिथि विष्णु को सबसे प्रिय है — इसमें अन्न नहीं, संयम का भोग लगता है।
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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
आरती: ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: द्वादशी के भीतर, सूर्योदय बाद। पहले तुलसी-जल, फिर अन्न।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।