एक माता से खुदाई करते समय अनजाने में स्याहू के बच्चे की हानि हो गई। पश्चाताप में उसने अहोई माता का व्रत रखा और उसकी संतान सुरक्षित रही। यह व्रत संतान की लंबी आयु का व्रत है।
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ॐ अहोई माता नमः
आरती: जय अहोई माता, मैया जय अहोई माता — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: तारों को अर्घ्य देने के बाद पारण करें। पहले गुनगुना जल, फिर हल्का भोजन।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।