कार्ड 17 / 24

हरतालिका तीज

गौरी-शंकर
भाद्रपद शुक्ल तृतीया — निर्जला व्रत

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कथा

पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया। सखियाँ उन्हें हर ले गईं और वन में रेत का शिवलिंग बनाकर उन्होंने पूजा की — इसी 'हरत' और 'आलिका' से नाम बना हरतालिका।

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मंत्र · 108 बार

ॐ गौरी शंकराय नमः

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आरती: जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

रेत/मिट्टीकेले के पत्तेबेलपत्रसुहाग सामग्रीमेहंदी व चूड़ीहरे वस्त्रफल-मिष्ठानदीप व धूप

व्रत में आहार

खाएं
  • पारण के बाद सात्विक
  • फल
  • दूध
  • खीर
न खाएं
  • दिनभर जल व अन्न
  • रात्रि निद्रा
  • लहसुन-प्याज़
  • मांस-मदिरा

पारण: अगली प्रातः पूजा पूरी कर पारण करें। अस्वस्थ या गर्भवती हों तो फल-जल की छूट है।

तुलसी रानी की सलाह

निर्जला व्रत है तो एक दिन पहले खूब पानी पियो और हल्का खाओ। मेहंदी रात को लगाओ, दिन में नहीं — गर्मी में रंग जल्दी उतरता है।

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।