सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले आई — तर्क से, हठ से नहीं। वट वृक्ष के नीचे ही यह हुआ था, इसीलिए उस वृक्ष की परिक्रमा कर यह व्रत रखा जाता है।
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ॐ सावित्र्यै नमः
आरती: जय सावित्री माता — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: कथा व परिक्रमा के बाद भीगे चने और फल से पारण करें, फिर सात्विक भोजन।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।