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वट सावित्री

सावित्री-सत्यवान व वट वृक्ष
ज्येष्ठ अमावस्या (उत्तर भारत) · वट पूर्णिमा (क्षेत्रानुसार)

अगला वट सावित्री कब है

कथा

सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले आई — तर्क से, हठ से नहीं। वट वृक्ष के नीचे ही यह हुआ था, इसीलिए उस वृक्ष की परिक्रमा कर यह व्रत रखा जाता है।

कथा ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

मंत्र · 108 बार

ॐ सावित्र्यै नमः

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आरती: जय सावित्री माता — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

कच्चा सूतभीगे चनेआम व लीचीसिंदूर-रोलीसुहाग सामग्रीजल-कलशपंखा (बाँस का)दीप व धूप

व्रत में आहार

खाएं
  • भीगे चने
  • मौसमी फल
  • दूध
  • सत्तू
न खाएं
  • दिनभर अन्न
  • लहसुन-प्याज़
  • मांस-मदिरा
  • तला-भुना

पारण: कथा व परिक्रमा के बाद भीगे चने और फल से पारण करें, फिर सात्विक भोजन।

आँवला बाबू की सलाह

बरगद की परिक्रमा में जो कच्चा सूत लपेटते हो, वह बाद में पेड़ से उतार लेना। सूत वहीं छूटा रहे तो तना घुटता है।

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।