मथुरा के कारागार में आधी रात को कृष्ण का जन्म हुआ, पहरे सो गए और बेड़ियाँ खुल गईं। वसुदेव उन्हें यमुना पार गोकुल ले गए। इसीलिए यह उत्सव ठीक बारह बजे मनाया जाता है।
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ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
आरती: आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की — तेज़, उत्साही लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: मध्यरात्रि जन्म व आरती के बाद प्रसाद लेकर पारण करें — पहले पंजीरी, फिर भोजन।
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