चैत्र नवरात्रि से नया संवत्सर शुरू होता है और नवमी को राम का जन्म होता है। नौ रातें देवी के नौ रूपों की हैं — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक, डर से शक्ति तक की यात्रा।
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ॐ दुं दुर्गायै नमः
आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: नवमी के कन्या पूजन व हवन के बाद पारण करें। पहले कन्याओं को भोजन, फिर स्वयं।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।