कार्ड 22 / 24

दीपावली पूजन

लक्ष्मी-गणेश
कार्तिक अमावस्या की संध्या — प्रदोष काल में पूजन

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कथा

राम चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे और नगर ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया। उसी अमावस्या की रात लक्ष्मी का आगमन माना जाता है — इसलिए घर पहले साफ़ होता है, फिर सजता है।

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मंत्र · 108 बार

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

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आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाकमल व लाल फूलकमलगट्टाखील-बताशेघी के दीपकरंगोलीबही-खातादीप व धूप

व्रत में आहार

खाएं
  • सात्विक भोजन
  • खील-बताशे
  • घर की मिठाई
  • मेवा
न खाएं
  • मांस-मदिरा
  • बासी भोजन
  • जुआ
  • देर रात भारी भोजन

पारण: व्रत ऐच्छिक है — पूजन तक सात्विक रहें, फिर प्रसाद लेकर भोजन करें।

हल्दी हीरो की सलाह

पूजा का दीपक घी का रखो और बाती रुई की। मिठाई घर की बनी हो तो और अच्छा — बाज़ार का खोया इस मौसम में जल्दी बिगड़ता है।

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।