राम चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे और नगर ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया। उसी अमावस्या की रात लक्ष्मी का आगमन माना जाता है — इसलिए घर पहले साफ़ होता है, फिर सजता है।
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ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: व्रत ऐच्छिक है — पूजन तक सात्विक रहें, फिर प्रसाद लेकर भोजन करें।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।