वीरावती ने भाइयों के छल से चंद्रोदय से पहले व्रत तोड़ दिया और पति को खो बैठा। फिर उसने पूरे वर्ष तप कर व्रत दोहराया और पति को वापस पाया। कथा कहती है — नियम पूरा निभाओ, आधा नहीं।
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ॐ शिवायै नमः
आरती: ॐ जय करवा मैया — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: चंद्र-अर्घ्य के बाद पति के हाथ से जल लेकर पारण करें। अस्वस्थ हों तो जल-फल की छूट है।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।