इसी रात्रि शिव और शक्ति का मिलन हुआ, और इसी रात समुद्र-मंथन का विष शिव ने कंठ में रोका। देवताओं ने रातभर जागकर उनकी स्तुति की — तभी से यह रात जागरण की रात है।
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ॐ नमः शिवाय
आरती: ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा — धीमी, गंभीर लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: चतुर्दशी बीतने पर अगली प्रातः स्नान कर पारण करें। पहले जल, फिर फल, फिर अन्न।
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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।