शनि कर्म के देवता हैं, दंड के नहीं। राजा विक्रमादित्य ने शनि की दशा भोगी और सत्य पर डटे रहे — अंत में शनि स्वयं प्रसन्न हुए। शनिवार का व्रत डर से नहीं, कर्म-शुद्धि के लिए रखा जाता है।
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ॐ शं शनैश्चराय नमः
आरती: जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी — धीमी, गंभीर लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।
पारण: संध्या दीपदान के बाद एक समय भोजन — उड़द की खिचड़ी उत्तम मानी जाती है।
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