कार्ड 07 / 24

शनिवार व्रत

शनि देव
हर शनिवार — शनि की साढ़ेसाती व ढैया में विशेष

अगला शनिवार व्रत कब है

कथा

शनि कर्म के देवता हैं, दंड के नहीं। राजा विक्रमादित्य ने शनि की दशा भोगी और सत्य पर डटे रहे — अंत में शनि स्वयं प्रसन्न हुए। शनिवार का व्रत डर से नहीं, कर्म-शुद्धि के लिए रखा जाता है।

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मंत्र · 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

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आरती: जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी — धीमी, गंभीर लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

सरसों का तेलकाले तिलउड़द दालनीले फूलकाला वस्त्रलोहे का दीपकधूपगुड़

व्रत में आहार

खाएं
  • उड़द की खिचड़ी
  • तिल
  • फल
  • दूध
न खाएं
  • नमक (परंपरानुसार)
  • लहसुन-प्याज़
  • मांस-मदिरा
  • बासी भोजन

पारण: संध्या दीपदान के बाद एक समय भोजन — उड़द की खिचड़ी उत्तम मानी जाती है।

जौ जी की सलाह

शनिवार को उड़द की दाल और तिल का दान करो। और सरसों के तेल का दीपक पीपल के नीचे संध्या को जलाओ, दोपहर में नहीं।

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।