कार्ड 02 / 24

प्रदोष व्रत

भगवान शिव
हर मास दो बार — त्रयोदशी तिथि, सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल

अगला प्रदोष व्रत कब है

कथा

समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने त्रयोदशी की संध्या में कंठ में धारण किया। देवताओं ने उसी प्रदोष काल में उनकी स्तुति की — तभी से यह समय शिव-पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त माना गया।

कथा ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

मंत्र · 108 बार

ॐ नमः शिवाय

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आरती: ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा — धीमी, गंभीर लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

बेलपत्रसफेद फूलकच्चा दूधदही, घी, शहदभस्म व चंदनधतूरा (क्षेत्रानुसार)दीप व धूपगंगाजल

व्रत में आहार

खाएं
  • फल व दूध
  • नारियल पानी
  • मेवा
  • सेंधा नमक
न खाएं
  • अन्न व दाल
  • लहसुन-प्याज़
  • तला-भुना
  • मांस-मदिरा

पारण: पूजा व आरती के तुरंत बाद प्रसाद लेकर पारण करें — अगले दिन की प्रतीक्षा नहीं।

दादी की सलाह

प्रदोष का पूरा फल संध्या में है, दिनभर भूखे रहने में नहीं। दिन में फलाहार लो, और सूर्यास्त से डेढ़ घंटा पहले नहा-धोकर तैयार हो जाओ।

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।