कार्ड 10 / 24

संकष्टी चतुर्थी

गणेश जी
हर मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — चंद्रोदय तक व्रत

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कथा

संकष्टी का अर्थ है संकट हरने वाली। गणेश जी ने इसी तिथि पर भक्तों को वचन दिया कि जो चंद्रोदय तक व्रत रखकर उन्हें दूर्वा अर्पित करेगा, उसका विघ्न वे स्वयं उठा लेंगे।

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मंत्र · 108 बार

ॐ गं गणपतये नमः

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आरती: जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा — मध्यम लय. ऑडियो शीघ्र आ रहा है।

पूजा विधि

पूजा सामग्री

दूर्वा-दल (21)मोदक/लड्डूसिंदूरलाल फूलअक्षतकेलादीप व धूपजल-कलश

व्रत में आहार

खाएं
  • फल व फलाहार
  • दूध व मेवा
  • साबूदाना
  • सेंधा नमक
न खाएं
  • अन्न व दाल
  • लहसुन-प्याज़
  • साधारण नमक
  • मांस-मदिरा

पारण: चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही पारण करें — चंद्रदर्शन के बिना व्रत अधूरा है।

मूंग मौसी की सलाह

दूर्वा हमेशा इक्कीस की गिनती में और तीन पत्ती वाली चुनो। और मोदक में गुड़-नारियल भरो, चीनी नहीं — वही असली भोग है।

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क्षेत्र व परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है। तिथि की पुष्टि अपने पंचांग से करें।