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कुकर या कढ़ाई?

दस पर्चे। सवाल यह नहीं कि कौन सा बर्तन अच्छा है — सवाल यह है कि किस चीज़ के लिए कौन सा।

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1 / 10 · सीधी बात
गलनाभुनना

दोनों जीतते हैं — अलग-अलग कामों में

जो गलना है, वह कुकर में। जो भुनना है, वह कढ़ाई में।

कुकर भाप का बर्तन है — बंद, गीला, दबाव वाला। कढ़ाई आँच का बर्तन है — खुली, सूखी, तेज़।

दाल, राजमा, छोले, साबुत अनाज — इन्हें गलना है, तो कुकर। सब्ज़ी, मसाला, तड़का, भुनाई — इन्हें भूरा होना है, तो कढ़ाई। एक ही बर्तन में सब पकाने की कोशिश ही आधी गड़बड़ है।

बहस “कौन सा बेहतर” की नहीं है। बहस काम की है।
2 / 10 · पोषण
90–95%कमकुकरखुली उबाल

कुकर पोषण चुराता नहीं — बचाता है

यह सबसे आम ग़लतफ़हमी है। कुकर में पानी कम लगता है और समय कम लगता है — और पोषण यही दो चीज़ें बचाती हैं।

  • अध्ययनों में कुकर में पकी चीज़ों का लगभग 90–95% पोषण बचा मिलता है
  • पालक को कढ़ाई में 30 मिनट पकाने पर विटामिन C का लगभग 95% चला गया; कुकर में 10 मिनट पर लगभग 90% — यानी कम समय, कम नुक़सान
  • खुले बर्तन में देर तक उबालना सबसे ज़्यादा नुक़सान करता है

असली चोर दबाव नहीं है। असली चोर है लंबा समय और ढेर सारा पानी, जो फेंक दिया जाए।

दाल का उबला पानी फेंकना — रसोई का सबसे बड़ा पोषण-नुक़सान।
3 / 10 · लोहा
1.5–3×लोहे की कढ़ाईलोहा

लोहे की कढ़ाई खाने में लोहा जोड़ती है

डेढ़ से तीन गुना तक ज़्यादा लोहा

यह लोक-कथा नहीं है। लोहे के बर्तन में पके भोजन में लोहे की मात्रा कई गुना बढ़ी हुई मिलती है, और शोध की समीक्षाओं में हीमोग्लोबिन बढ़ता हुआ पाया गया है।

  • खटाई और तेज़ आँच — लोहा उतना ही अधिक उतरता है
  • भारत में हर दूसरी स्त्री में ख़ून की कमी है; यह मुफ़्त का सहारा है
  • साथ में नींबू या आँवला — लोहा शरीर में बेहतर लगता है
सावधानी — थैलेसीमिया या शरीर में लोहा जमने की बीमारी (हीमोक्रोमैटोसिस) हो तो डॉक्टर से पूछकर ही रोज़ लोहे में पकाएँ।
4 / 10 · कुकर किसके लिए
दाल · राजमा · छोले

कुकर — जो गलने में ज़िद्दी है

  • दालें — अरहर, मूंग, चना, उड़द
  • राजमा, छोले, लोबिया — रातभर भिगोकर
  • साबुत अनाज — गेहूँ, जौ, ब्राउन राइस, बाजरा
  • खिचड़ी, चुकंदर, आलू, मीट
  • भाप की सब्ज़ी — बिना सीटी, कुकर खुला ढककर

भिगोना + कुकर = फाइटेट घटता है, गैस कम बनती है, और दाल पचने में हल्की हो जाती है। कमज़ोर पाचन, बुज़ुर्ग और बीमारी के बाद — कुकर ही बेहतर है।

भिगोया हुआ पानी फेंक दें। पकाया हुआ पानी नहीं।
5 / 10 · कढ़ाई किसके लिए
तेज़ आँच · भुनाई

कढ़ाई — जहाँ भाप दुश्मन है

कुकर में सब्ज़ी गल तो जाती है, पर भाप में पानी छोड़कर लिबलिबी हो जाती है। जिस चीज़ को भूरा, करारा या सूखा रहना है, उसे खुली आँच चाहिए।

  • सूखी सब्ज़ी — भिंडी, करेला, आलू-गोभी, बैंगन
  • मसाला भूनना — प्याज़-टमाटर की ग्रेवी की पूरी जान इसी में है
  • तड़का — जीरा, हींग, राई, कढ़ी पत्ता
  • तलना — पूरी, पकौड़ी, पापड़

लोहे की कढ़ाई गरमी पकड़कर रखती है, इसलिए सब्ज़ी डालने पर आँच गिरती नहीं — और यही भुनाई देती है।

भुनाई एक स्वाद है जो दबाव में बन ही नहीं सकता।
6 / 10 · सीटी का हिसाब
दाल — 3–4राजमा — 5–6छोले — 6–8

कितनी सीटी, किसके लिए

अरहर/मूंग दाल3–4 सीटी
चना दाल4–5 सीटी
राजमा5–6 सीटी — रातभर भीगा हुआ
छोले6–8 सीटी — रातभर भीगे हुए
चावल2 सीटी
आलू2–3 सीटी

पहली सीटी तेज़ आँच पर, उसके बाद आँच धीमी। दबाव अपने आप उतरने दें — ज़बरदस्ती खोलने से दाल फट जाती है और हाथ जल सकता है।

कुकर दो-तिहाई से ज़्यादा कभी न भरें; दाल-चावल के लिए आधे तक ही, वे झाग उठाते हैं। सीटी की जाली हर बार साफ़, और रबर साल-दो साल में बदल दें।
7 / 10 · चेतावनी
स्टीलएल्युमिनियम

एल्युमिनियम + खटाई = धातु खाने में

यह कुकर की असली कमज़ोरी है — दबाव नहीं, धातु। खट्टी चीज़ों के साथ एल्युमिनियम अधिक घुलता है, और जितनी खटाई व जितनी देर, उतना अधिक।

  • सांभर, रसम, कढ़ी, टमाटर की ग्रेवी, इमली-आमचूर — एल्युमिनियम में लंबा न पकाएँ
  • सबसे आसान हल — स्टेनलेस स्टील का कुकर
  • एल्युमिनियम ही है तो खटाई आख़िर में डालें, और पकते ही दूसरे बर्तन में निकाल लें
  • पका खाना रातभर कुकर में रखा न छोड़ें
रोज़ की दाल, चावल और आलू के लिए एल्युमिनियम ठीक है। दिक़्क़त खटाई से है, कुकर से नहीं।
8 / 10 · नॉन-स्टिक
260°Cइसके ऊपर परत टूटती हैख़ाली बर्तन मिनटों में पहुँच जाता है

नॉन-स्टिक के तीन नियम

  • खाली कभी गरम न करें। ख़ाली बर्तन कुछ ही मिनटों में 260°C पार कर जाता है — जहाँ से परत टूटने और धुआँ छोड़ने लगती है।
  • तेज़ आँच नहीं। भुनाई और तड़का लोहे की कढ़ाई का काम है, नॉन-स्टिक का नहीं।
  • लोहे की खुरचनी नहीं। लकड़ी या सिलिकॉन। परत खुरचने या उखड़ने लगे तो बर्तन बदल दें।

और एक बात — नॉन-स्टिक से उठा धुआँ पिंजरे के पक्षियों के लिए जानलेवा होता है। घर में तोता या बजरी हो तो रसोई की खिड़की खुली रखें।

नॉन-स्टिक अंडे, डोसे और कम तेल की चीज़ों के लिए है। बाक़ी सब कढ़ाई में।
9 / 10 · देखभाल
सुखाएँ, फिर तेल

लोहे की कढ़ाई कैसे सँभालें

  • नई कढ़ाई — तेल लगाकर धुआँ उठने तक गरम करें, ठंडी होने दें; दो-तीन बार दोहराएँ
  • धोने के बाद — आँच पर सुखाएँ, फिर तेल की हल्की परत। जंग की पूरी कहानी बस इतनी है
  • जंग लग जाए — रगड़कर हटाएँ, गरम करें, तेल लगाएँ। कढ़ाई फेंकने की चीज़ नहीं है
  • खाना उसमें रखा न छोड़ें — स्वाद लोहे जैसा हो जाता है, और खटाई देर तक रहे तो परत भी जाती है

साबुन थोड़ा-सा चलेगा, पर रोज़ नहीं। गरम पानी और कड़ा स्क्रब बहुत है।

बाक़ी बर्तन घिसते हैं। लोहे की कढ़ाई जितनी पुरानी, उतनी अच्छी — दादी की कढ़ाई बेकार नहीं थी।
10 / 10 · एक नज़र में
दाल — कुकरसब्ज़ी — कढ़ाईखटाई — स्टीलअंडा — नॉन-स्टिक

कौन सा बर्तन, किसके लिए

दाल, राजमा, छोलेकुकर — स्टेनलेस स्टील बेहतर
सूखी सब्ज़ी, भुनाईलोहे की कढ़ाई
टमाटर, इमली, कढ़ीस्टेनलेस स्टील
अंडा, डोसा, कम तेलनॉन-स्टिक, धीमी आँच

एक बर्तन में सब नहीं — काम के हिसाब से बदलिए।

यह पन्ना घर में रसोई सँभालने वाले को भेजिए। नया बर्तन ख़रीदने से पहले पढ़ लेना सस्ता पड़ता है।

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यह चिकित्सा सलाह नहीं है। बर्तन बदलने से ख़ून की कमी का इलाज नहीं हो जाता — लोहे की कढ़ाई सहारा है, दवा नहीं। लगातार थकान, चक्कर या साँस फूलना हो तो हीमोग्लोबिन की जाँच कराएँ और डॉक्टर को दिखाएँ।