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चलना

दस पर्चे। और पहली ही बात यह — “दस हज़ार कदम” किसी शोध से नहीं आए।

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1 / 10 · वह संख्या
7,00010,0002,000यहाँ से सपाट

दस हज़ार कदम एक विज्ञापन था

1965 में जापान की एक कंपनी ने कदम गिनने वाला यंत्र बेचा — नाम रखा “मानपो-केई”, यानी दस-हज़ार-कदम-मापी। नंबर इसलिए चुना गया कि याद रखने में आसान था। उसके पीछे कोई अध्ययन नहीं था।

7,000 कदम पर लगभग सारा फ़ायदा मिल जाता है।

बड़े विश्लेषणों में 2,000 कदम की तुलना में 7,000 कदम पर मृत्यु का जोखिम लगभग 47% कम मिला — और उसके बाद रेखा लगभग सपाट हो जाती है।

जो सबसे कम चलते हैं, उन्हें सबसे ज़्यादा फ़ायदा है। 2,000 से 4,000 तक जाना, 8,000 से 10,000 जाने से कहीं बड़ी बात है।
2 / 10 · रफ़्तार
100 / मिनटबात — हाँगाना — नहीं

गिनती से ज़्यादा चाल मायने रखती है

टहलना और चलना एक बात नहीं। फ़ायदा वहाँ से शुरू होता है जहाँ साँस थोड़ी तेज़ हो।

मिनट में लगभग 100 कदम

यही “तेज़ चाल” है। घड़ी न हो तो सबसे आसान पैमाना यह है — बात कर सकें, पर गा न सकें। इससे धीमे हैं तो थोड़ा बढ़ाइए; हाँफ रहे हैं तो थोड़ा घटाइए।

बीस मिनट तेज़ चाल, चालीस मिनट धीमी चहलक़दमी से ज़्यादा काम की है।
3 / 10 · शतपावली
बिना चले10 मिनट चलकरउछाल 22–50% कम

खाने के बाद दस मिनट — सबसे सस्ती दवा

खाने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की चहलक़दमी खाने के बाद चढ़ने वाली शुगर को काफ़ी घटा देती है।

उछाल 22 से 50% तक कम

  • तुरंत बाद चलना सबसे असरदार — घंटे भर बाद नहीं
  • रात के खाने के बाद का फ़ायदा सबसे बड़ा दिखता है
  • तेज़ चलने की ज़रूरत नहीं — सादी चाल काफ़ी है

हमारे यहाँ इसे शतपावली कहा गया — सौ कदम। यह उन थोड़ी-सी परंपराओं में है जिन्हें माप ने ज्यों का त्यों सही पाया।

शुगर या प्री-डायबिटीज़ हो तो यह दस मिनट पूरे दिन के दस हज़ार कदम से ज़्यादा काम के हैं।
4 / 10 · घुटने
40%कम दर्द

चलने से घुटने घिसते नहीं

“घुटने बचाने हैं तो कम चलो” — यही सलाह सबसे ज़्यादा नुक़सान करती है।

पचास से ऊपर के जिन लोगों को घुटने का गठिया था, उनमें चलने वालों को बार-बार होने वाला दर्द लगभग 40% कम हुआ। रोज़ चलने से घुटना बदलवाने की नौबत बढ़ती हुई नहीं मिली।

जोड़ को हिलना-डुलना चाहिए — उसी से चिकनाई बनती है और आसपास की माँसपेशी मज़बूत रहती है, जो असल में घुटने का बोझ उठाती है।

अपवाद — जोड़ सूजा हुआ, गरम या लाल हो तो उस समय आराम और डॉक्टर। दर्द चलने के बाद बढ़ता जाए, तो सलाह लीजिए।
5 / 10 · नंगे पाँव
मधुमेह मेंकभी नहींनंगे पाँव

ओस वाली घास और आँखों का किस्सा

सुबह घास पर नंगे पाँव चलना अच्छा लगता है — ठंडक, मिट्टी, थोड़ा सुकून। पर इससे नज़र नहीं सुधरती। इसका कोई भरोसेमंद प्रमाण नहीं है।

और एक ज़रूरी चेतावनी — मधुमेह हो तो नंगे पाँव कभी नहीं।

शुगर में पैरों की संवेदना घट जाती है। काँच, काँटा, कंकड़ या गरम फ़र्श की चोट का पता ही नहीं चलता — और वही छोटी-सी चोट आगे चलकर न भरने वाला घाव बन जाती है। भारत में पैर कटने का सबसे आम कारण यही रास्ता है।

शौक़ है तो घर की साफ़ ज़मीन या अपने आँगन में, देखकर। पार्क, मंदिर का प्रांगण और सड़क — कभी नहीं।
6 / 10 · हवा
भीड़ वाली सड़कपार्क · गली

कहाँ चलते हैं, यह भी मायने रखता है

चलते समय साँस गहरी और तेज़ होती है — यानी जो हवा है, वह ज़्यादा अंदर जाती है। व्यस्त सड़क के किनारे चलना इसी को उल्टा कर देता है।

  • पार्क, गली, कॉलोनी — मुख्य सड़क से कुछ क़दम हटकर ही हवा बेहतर होती है
  • भीड़ के घंटों से बचिए — सुबह-शाम के ट्रैफ़िक के बीच नहीं
  • हवा बहुत ख़राब हो, या धुआँ-कोहरा हो — उस दिन घर के अंदर चलिए, छत पर, या सीढ़ियाँ
  • दमा या सी.ओ.पी.डी. हो तो यह सलाह और सख़्ती से
सर्दियों की सुबह की धुंध सबसे ख़राब समय होती है — देर से निकलना उस दिन बेहतर है।
7 / 10 · पैर
जगह चाहिएरोज़ पैरदेखिए

जूते, और रोज़ पैर देखना

  • जूता चौड़ा हो — उँगलियाँ हिल सकें; तंग जूता छाले और नाख़ून ख़राब करता है
  • दोपहर या शाम को ख़रीदिए, जब पैर थोड़ा फूला होता है
  • मोज़े पहनिए — सूती, बिना गाँठ वाले
  • नया जूता धीरे-धीरे — पहले दिन लंबी सैर नहीं

मधुमेह हो तो एक काम रोज़: पैर देखिए — तलवा, उँगलियों के बीच, एड़ी। ख़ुद न दिख पाए तो शीशे से, या घर के किसी से कहिए। कोई कटा, छाला या रंग बदला दिखे तो टालिए मत।

और जूता पहनने से पहले उलटकर झाड़ लीजिए। कंकड़ का पता न चलना ही असली ख़तरा है।
8 / 10 · कितना
150 मिनट / हफ़्तारोज़ 20–25 मिनट, या तीन बार 8

हफ़्ते का हिसाब, टुकड़ों में

हफ़्ते में150 मिनट तेज़ चाल — यही विश्व-मानक है
यानीरोज़ लगभग 20–25 मिनट
यादिन में तीन बार 8 मिनट — गिनती वही है

टुकड़ों में चला हुआ भी पूरा गिना जाता है। यह पुरानी बात बदल चुकी है कि “कम से कम दस मिनट लगातार चाहिए”।

रोज़ थोड़ा, हफ़्ते में एक दिन बहुत से बेहतर है — शरीर लय पकड़ता है, और चोट भी कम लगती है।

जिस दिन कुछ न हो सके, उस दिन भी दस मिनट। शून्य और दस मिनट के बीच का फ़र्क़ सबसे बड़ा फ़र्क़ है।
9 / 10 · चेतावनी
चलने परआए — रुकने पर जाए

कुछ तकलीफ़ें उम्र नहीं होतीं

चलते समय कुछ चीज़ें ऐसी हैं जिन्हें “अब उम्र हो गई” कहकर टाल देना महँगा पड़ता है:

  • सीने में भारीपन, जकड़न या दबाव जो चलने पर आए और रुकने पर चला जाए — यह दिल का संकेत है। इसे टालिए मत
  • पिंडली में दर्द जो चलने पर आए और खड़े होते ही ठीक हो जाए — पैरों की नसों की सिकुड़न का संकेत
  • पहले से बहुत कम दूरी पर साँस फूलना
  • चलते हुए चक्कर या लड़खड़ाना

इनमें से कुछ भी हो तो चलना बढ़ाने से पहले डॉक्टर से मिलिए।

“चलने पर आना और रुकने पर जाना” — यही वह ढर्रा है जिसे डॉक्टर सबसे पहले पूछते हैं। यही बात कहिए।
10 / 10 · आज
खाने के बाद 10 मिनटदस हज़ार भूलिएबात हो, गाना नहींजूते पहनकर

आज से चार बातें

  • रात के खाने के बाद 10 मिनट — यही सबसे बड़ा फ़ायदा
  • दस हज़ार भूल जाइए; अपने आज से थोड़ा ज़्यादा
  • चाल ऐसी कि बात हो सके, गाना नहीं
  • मधुमेह है तो जूते पहनकर, और रोज़ पैर देखकर

सबसे अच्छी सैर वह है जो रोज़ हो जाए।

यह पन्ना घर के उन बड़ों तक पहुँचाइए जिन्होंने घुटनों के डर से चलना छोड़ दिया है।

भोजनवेद · मुफ़्त, कोई विज्ञापन नहीं · bhojanveda.com/chalna

यह चिकित्सा सलाह नहीं है। चलने पर सीने में दर्द या दबाव, बहुत साँस फूलना, चक्कर आना या पिंडली का दर्द — इनमें अभ्यास बढ़ाने से पहले चिकित्सक से मिलिए। दिल की बीमारी, हाल की सर्जरी, गंभीर गठिया या गर्भावस्था में चलने की मात्रा अपने चिकित्सक से तय कराइए। मधुमेह में पैर की कोई भी चोट, छाला या रंग-बदलाव तुरंत दिखाइए।