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सिगरेट कैसे छोड़ें

दस पर्चे, और सब एक ही नियम पर टिके हैं — अगली सिगरेट कभी हाथ की पहुँच में न हो। बाक़ी सब उसी के इर्द-गिर्द है।

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1 / 10 · नियम
दुकान

पैकेट घर में मत रखिए

हर सिगरेट की क़ीमत — दुकान तक का एक चक्कर।

यह पूरे पन्ने की सबसे काम की बात है। पैकेट जेब में हो तो तलब और सिगरेट के बीच कुछ नहीं बचता — हाथ बढ़ा, और हो गया।

पैकेट घर, जेब और गाड़ी — तीनों से हटा दीजिए। अब हर सिगरेट के लिए उठना पड़ेगा, चप्पल पहननी पड़ेगी, दुकान तक चलना पड़ेगा। यही मेहनत आपकी दोस्त है।

शरीर को आलस प्यारा है। उसी आलस को अपने पक्ष में लगाइए।
2 / 10 · यह चलता क्यों है
तलब3–5 मिनट में, अपने आप

तलब सिर्फ़ 3–5 मिनट की होती है

एक तलब लहर की तरह आती है, चढ़ती है, और तीन से पाँच मिनट में अपने आप उतर जाती है — चाहे आप सिगरेट पिएँ या न पिएँ।

दुकान तक जाने में भी इतना ही समय लगता है। यानी जब तक आप वहाँ पहुँचेंगे, बहुत बार तलब पहले ही जा चुकी होगी — और आप ख़ाली हाथ लौट आएँगे।

यही कारण है कि दूरी काम करती है। आप इच्छाशक्ति से नहीं जीतते; आप घड़ी से जीतते हैं।

तलब सबसे तेज़ छोड़ने के दूसरे-तीसरे दिन आती है। वह ढलान है, चढ़ाई नहीं।
3 / 10 · पहले दिन
दिन 2–3हफ़्ते 2–4सबसे भारी

तीन दिन सबसे भारी, फिर हल्का

छोड़ने के बाद चिड़चिड़ाहट, बेचैनी, नींद का उखड़ना और भूख का बढ़ना — ये सब होते हैं। ये बीमारी नहीं, शरीर का सफ़ाई-काल है।

  • दिन 2–3 — सबसे कठिन। यहीं अधिकतर लोग फिसलते हैं।
  • हफ़्ता 2–4 — शरीर का हिस्सा शांत हो जाता है।
  • उसके बाद — जो बचता है वह आदत है, नशा नहीं। आदत के लिए रास्ता बदलना काफ़ी है।

तीन दिन का हिसाब रखिए। बस तीन।

तंबाकू, बीड़ी, गुटखा, ख़ैनी — नियम सबका एक है।
4 / 10 · शरीर
20 मि12 घं2 हफ़्ते1 सालघड़ी आख़िरी सिगरेट से चलती है

शरीर उसी दिन से सुधरना शुरू करता है

20 मिनटधड़कन सामान्य की ओर लौटने लगती है
12 घंटेख़ून से कार्बन मोनोऑक्साइड निकल जाती है — ऑक्सीजन की जगह बनती है
2 हफ़्तेसाँस खुलने लगती है; चलने-चढ़ने में फ़र्क़ महसूस होता है
1 सालदिल के दौरे का ख़तरा लगभग आधा
आगेछोड़ने वाले औसतन कई वर्ष अधिक जीते हैं

यह प्रतीक्षा नहीं है। आख़िरी सिगरेट बुझते ही घड़ी चल पड़ती है।

स्रोत — WHO, CDC व अमेरिकन कैंसर सोसायटी की सार्वजनिक समय-सारणी।
5 / 10 · जड़
इशारा तोड़िए

सिगरेट नहीं, उसका मौक़ा छोड़िए

तलब घड़ी देखकर नहीं आती — वह इशारे देखकर आती है। सुबह की चाय, भोजन के बाद, शौच, गाड़ी की सीट, दफ़्तर की सीढ़ी, वही दोस्त, वही चौराहा।

दो हफ़्ते के लिए उन इशारों को तोड़ दीजिए:

  • चाय दूसरी जगह बैठकर पिएँ — या कुछ दिन चाय की जगह छाछ, नींबू-पानी
  • भोजन के तुरंत बाद उठकर दो मिनट टहलें
  • जिस चौराहे पर दुकान है, दो हफ़्ते दूसरा रास्ता लें
  • दोस्तों से साफ़ कह दीजिए — “मैंने छोड़ दी है”
रास्ता बदलना इच्छाशक्ति से सस्ता पड़ता है।
6 / 10 · हाथ व मुँह
सौंफ · मिश्री · लौंग

मुँह को कुछ दीजिए, हाथ को कुछ

आधी आदत निकोटीन की है, आधी सिर्फ़ मुँह और उँगलियों की। रसोई से ही काम चल जाता है:

  • सौंफ व मिश्री — जेब में रखिए; तलब उठते ही एक चम्मच मुँह में
  • लौंग — एक लौंग गाल में दबाकर रखें, तीख़ापन ध्यान बाँट देता है
  • मुलेठी की डंडी — चबाने को कुछ चाहिए तो यह; पर उच्च रक्तचाप हो तो नहीं
  • अजवाइन — चुटकी भर, चबाकर; बेचैनी व गैस दोनों में
  • पानी — हर तलब पर एक गिलास, घूँट-घूँट
ये आदत का साथ छुड़ाते हैं। नशा घड़ी छुड़ाती है।
7 / 10 · जो नहीं करना
“एक आख़िरी”

चार जाल

  • “एक आख़िरी सिगरेट” — कोई आख़िरी नहीं होती। वह अगली की भूमिका है।
  • स्टॉक करना — “रख लेता हूँ, ज़रूरत पड़ी तो” का मतलब है ज़रूरत पड़ेगी।
  • “कल से” — कल का कोई पता नहीं। आख़िरी सिगरेट वही है जो पी चुके।
  • अकेले लड़ना — घरवालों को बता दीजिए। चुपचाप छोड़ना सबसे कठिन तरीक़ा है।

और एक बात: सिगरेट घटाकर छोड़ने की योजना अधिकतर लोगों में टिकती नहीं। तारीख़ तय कीजिए और उस दिन से बंद।

जिस दिन बंद करें, उस दिन लाइटर व ऐशट्रे भी बाहर।
8 / 10 · फिसलन
दिन 1 — आज

फिसल गए तो हारे नहीं

एक सिगरेट पी ली — यह पूरी कोशिश का अंत नहीं है। अधिकांश लोग छोड़ने से पहले कई बार फिसलते हैं, और फिर भी छोड़ देते हैं।

बस यह पूछिए: कौन-सा इशारा था? चाय? ग़ुस्सा? दोस्त? वही अगली बार का काम है।

गिनती फिर से शुरू कीजिए। दिन 1 आज है।

एक सिगरेट एक सिगरेट है। पैकेट तभी बनती है जब आप मान लें कि हार गए।
9 / 10 · मुफ़्त मदद
1800-11-2356सुबह 8 – रात 8 · मुफ़्त

सरकार की मुफ़्त हेल्पलाइन

📞 1800-11-2356

राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइन — स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार। सुबह 8 से रात 8 बजे, 16 भाषाओं में, बिल्कुल मुफ़्त।

यही नंबर हर सिगरेट व तंबाकू के पैकेट पर छपा होता है। वहाँ बैठे लोग रोज़ यही काम करते हैं — वे जानते हैं कि तीसरा दिन कैसा लगता है।

साथ ही: नज़दीकी सरकारी अस्पताल में तंबाकू-मुक्ति केंद्र होता है। अपने डॉक्टर से निकोटीन गम या पैच के बारे में पूछिए — छोड़ने की सम्भावना लगभग दोगुनी हो जाती है।

फ़ोन करना कमज़ोरी नहीं। यह सबसे सस्ता इलाज है जो भारत में मौजूद है।
10 / 10 · आज
पैकेट बाहरजेब में सौंफघर में बता दीजिए

आज ही तीन काम

  • घर, जेब व गाड़ी से पैकेट, लाइटर और ऐशट्रे बाहर
  • जेब में सौंफ-मिश्री की एक पुड़िया
  • घर में किसी एक को बता दीजिए कि आपने छोड़ दी है

अगली सिगरेट हाथ की पहुँच में न हो — बस इतना।

यह पन्ना किसी ऐसे को भेजिए जो छोड़ना चाहता है। पढ़ने से कुछ नहीं होता; भेजने से कभी-कभी हो जाता है।

भोजनवेद · मुफ़्त, कोई विज्ञापन नहीं · bhojanveda.com/chhodo

यह चिकित्सा सलाह नहीं है। साँस फूलना, लगातार खाँसी, बलगम में ख़ून, सीने में दर्द या आवाज़ का बैठ जाना — इनमें देर न करें, डॉक्टर को दिखाएँ। गर्भावस्था में, या दिल की बीमारी के साथ, छोड़ने की योजना डॉक्टर के साथ बनाइए।