दस पर्चे। “आठ गिलास” कोई नियम नहीं है — और कितना पिया, उससे बड़ा सवाल है कैसा पिया।
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1 / 10 · मात्रा
“आठ गिलास” किसी प्रमाण पर नहीं टिका
गिनती मत कीजिए। रंग देखिए।
ज़रूरत हर आदमी की अलग है, और एक ही आदमी की हर दिन अलग — गरमी, मेहनत, शरीर का आकार, बुख़ार, दस्त, स्तनपान। जून की दोपहर में खेत का काम और दिसंबर में दफ़्तर की कुर्सी एक हिसाब नहीं माँगते।
भरोसेमंद पैमाने सिर्फ़ दो हैं: प्यास, और पेशाब का रंग। दोनों मुफ़्त हैं और दोनों हर दिन सही जवाब देते हैं।
प्यास एक अच्छी घड़ी है। बुज़ुर्गों में यह घड़ी धीमी पड़ जाती है — वहाँ रंग देखना ज़्यादा भरोसेमंद है।
2 / 10 · पैमाना
पेशाब का रंग क्या कहता है
हल्का भूसे जैसापानी पूरा है — यही लक्ष्य है
गहरा पीलाकम पिया — एक-दो गिलास और
शहद जैसाकाफ़ी कम — अभी पीजिए
लगभग बेरंगबार-बार ऐसा हो तो ज़रूरत से ज़्यादा पी रहे हैं
सुबह का पहला पेशाब गहरा होना सामान्य है — रातभर पानी नहीं गया।
मूत्र परीक्षण → रंग, झाग, गंध और लक्षण चुनिए — दो मिनट की मुफ़्त जाँच बताएगी कि पानी बढ़ाना है या डॉक्टर को दिखाना।
रंग हमेशा पानी का हिसाब नहीं होता — विटामिन B की गोली उसे चमकीला पीला कर देती है, चुकंदर लाल, और कुछ दवाएँ भी रंग बदलती हैं। लाल या भूरा पेशाब बिना किसी कारण के दिखे तो डॉक्टर को दिखाएँ।
3 / 10 · सबसे ज़रूरी
पानी साफ़ हो — यह मात्रा से बड़ा सवाल है
इस देश में पानी से होने वाली बीमारी, पानी की कमी से कहीं ज़्यादा लोगों को बिठाती है। दस्त, टाइफ़ाइड, पीलिया — सब एक ही गिलास से आते हैं।
उबालना — खौलने लगने के बाद एक मिनट और; पहाड़ों पर तीन मिनट
ढककर रखें — उबला पानी खुले बर्तन में फिर गंदा हो जाता है
निकालें कलछी या टोंटी से — घड़े में हाथ या गिलास मत डालिए
फ़िल्टर हो तो कैंडल व झिल्ली समय पर बदलें — भरा हुआ फ़िल्टर ख़ुद गंदगी का घर है
बारिश के दिनों में और बाढ़ के बाद — उबालना छोड़िए मत, चाहे पानी साफ़ दिखे।
4 / 10 · जान बचाने वाली बात
दस्त में सादा पानी काफ़ी नहीं
दस्त में शरीर से पानी के साथ नमक भी निकलता है, और सादा पानी वह नमक वापस नहीं करता। कमज़ोरी यहीं से आती है।
सबसे अच्छा — ORS का पैकेट। सस्ता है, हर दुकान और हर सरकारी अस्पताल में मिलता है। घर में एक हमेशा रखिए।
पैकेट न हो तो — 1 लीटर साफ़ या उबालकर ठंडा किया पानी + 6 छोटे चम्मच चीनी + आधा छोटा चम्मच नमक।
नमक इससे ज़्यादा कभी नहीं — बच्चों में ज़्यादा नमक ख़तरनाक है
चीनी भी ज़्यादा नहीं — दस्त बढ़ जाते हैं
घोल 24 घंटे में फेंक दें, रोज़ नया बनाएँ
बच्चों को साथ में ज़िंक, 10–14 दिन
तुरंत डॉक्टर — पेशाब बंद, धँसी आँखें, बच्चा सुस्त या न जागे, ख़ून वाले दस्त, या उल्टी के कारण कुछ भी अंदर न रुके।
5 / 10 · पुरानी ग़लतफ़हमी
भोजन के साथ पानी पाचन नहीं बिगाड़ता
“खाने के साथ पानी पाचक रस पतला कर देता है” — यह बात प्रमाणों पर खरी नहीं उतरती। पेट ज़रूरत के हिसाब से अम्ल बनाता है, और घूँट-घूँट पानी कौर को आगे सरकाने में मदद ही करता है।
आयुर्वेद में भी यही कहा गया है — भोजन के बीच थोड़ा-थोड़ा जल। मनाही एक साथ पेट भर पानी की है, हर घूँट की नहीं।
एक असली अपवाद: जिन्हें अम्लता या रिफ़्लक्स रहता है, उनमें खाने के साथ एक बार में बहुत सारा पानी पेट पर दबाव बढ़ाकर जलन कर सकता है। वहाँ कम-कम, धीरे।
बहुत ठंडा पानी खाने के साथ असहज लगे तो सादा या गुनगुना लीजिए — यह सुविधा की बात है, पाचन की नहीं।
6 / 10 · तांबा
तांबे का लोटा — सच और अफ़वाह
सच — तांबे के बर्तन में रातभर रखे पानी में हैज़ा और टाइफ़ाइड जैसे रोगाणु घट जाते हैं, और उसमें उतरने वाला तांबा सुरक्षित सीमा के भीतर रहता है। यह असली फ़ायदा है।
अफ़वाह — “तांबे का पानी मोटापा, गठिया, कैंसर ठीक करता है।” किसी रोग की दवा यह नहीं है।
रखें तो 8 घंटे या रातभर; कुछ मिनट रखने से कुछ नहीं होता
सादा पानी ही — नींबू, इमली, छाछ जैसी खट्टी चीज़ें कभी नहीं
बर्तन को नींबू-नमक या इमली से नियमित माँजें
बहुत गंदे पानी के लिए यह उबालने का विकल्प नहीं है
लिवर की बीमारी या विल्सन रोग (शरीर में तांबा जमने की बीमारी) हो तो रोज़ का उपयोग डॉक्टर से पूछकर।
7 / 10 · गरम पानी
उष्णोदक — जहाँ यह काम करता है
सच — गुनगुना पानी गले की ख़राश, कफ़, सर्दी-ज़ुकाम और क़ब्ज़ में आराम देता है। और उबालकर ठंडा किया पानी हर हाल में सबसे सुरक्षित पानी है।
झूठ — “गरम पानी चर्बी पिघला देता है।” नहीं पिघलाता। पेट भरा लगने से थोड़ा कम खाया जाए, यह अलग बात है।
सुबह का नींबू-पानी ठीक है, पर जादू नहीं। एक छोटी सावधानी — खटाई दाँत की परत घिसाती है, इसलिए पीने के बाद सादे पानी से कुल्ला कर लीजिए और तुरंत ब्रश मत कीजिए।
बहुत गरम — भाप उठता — पानी रोज़ पीना गले और भोजन-नली के लिए ठीक नहीं। गुनगुना बस।
8 / 10 · दूसरा किनारा
ज़्यादा पानी भी नुक़सान करता है
बहुत ज़्यादा पानी थोड़े समय में पी लेने से ख़ून का नमक घट जाता है। यह कम होता है, पर होता है — और गंभीर होता है।
लक्षण भ्रमित करते हैं क्योंकि वे कमज़ोरी जैसे लगते हैं: सिरदर्द, जी मिचलाना, उलझन, बहुत ज़्यादा सुस्ती।
और वह वजह जो अक्सर इसके पीछे होती है — “शरीर के विष निकालने के लिए” ज़बरदस्ती पानी पीना। गुर्दे यह काम पहले से कर रहे हैं; उन्हें और पानी देने से वे तेज़ नहीं चलते।
एक सीधा नियम — प्यास न हो तो घंटे भर में एक लीटर से ज़्यादा लगातार मत पीजिए।
9 / 10 · अलग हिसाब
जिनका हिसाब सबसे अलग है
ज़्यादा चाहिए —
पथरी — कम से कम 2.5 लीटर रोज़। यह सबसे मज़बूत प्रमाण वाली सलाह है: पेशाब दिन में 2 लीटर से ऊपर रहे तो दोबारा पथरी का ख़तरा लगभग आधा रह जाता है
गरमी में मज़दूरी या खेत का काम — पानी के साथ नमक-चीनी या नींबू-शिकंजी भी
बुख़ार, दस्त, उल्टी, स्तनपान
नाप-तौलकर —
दिल की कमज़ोरी, गुर्दे की बीमारी, डायलिसिस — डॉक्टर की बताई मात्रा से एक गिलास भी ऊपर नहीं
इन बीमारियों में “ज़्यादा पानी अच्छा होता है” वाली आम सलाह उल्टी पड़ती है।
10 / 10 · आज
आज ही चार काम
पानी बैठने की जगह के पास रखिए — याद दिलाने का सबसे सस्ता तरीक़ा
आज एक बार रंग देखिए
पीने का पानी उबालकर, ढककर रखिए
घर में ORS का एक पैकेट — आज ही
प्यास एक अच्छी घड़ी है। उसे अनसुना मत कीजिए।
यह पन्ना घर के बड़े-बुज़ुर्गों तक पहुँचाइए — उनमें प्यास की घड़ी सबसे पहले धीमी पड़ती है।
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यह चिकित्सा सलाह नहीं है। दस्त या उल्टी में बच्चा सुस्त पड़ जाए, पेशाब आना बंद हो जाए, आँखें धँस जाएँ या मुँह सूखा रहे — देर न करें, तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएँ। दिल या गुर्दे की बीमारी में पानी की मात्रा अपने डॉक्टर से तय कराएँ।