आधा चम्मच हल्दी एक कप गर्म दूध या गर्म पानी में, दिन में एक-दो बार। साथ में चुटकी काली मिर्च लेने से अवशोषण बढ़ता है।
परंपरागत
सावधानीरसोई में डाली जाने वाली मात्रा सुरक्षित है। गोली या सत्व के रूप में ज़्यादा मात्रा ख़ून पतला करने वाली दवाओं के साथ नहीं। पित्ताशय में पथरी हो तो ज़्यादा मात्रा से बचें। सर्जरी से पहले बंद करें।
नीम · Neem
4-5 कोमल नीम पत्तियाँ खाली पेट चबाएँ, या पत्तियों का काढ़ा बनाकर प्रभावित त्वचा धोएँ।
परंपरागत
सावधानीगर्भावस्था में और गर्भधारण की कोशिश में नीम खाना नहीं। छोटे बच्चों को नीम का तेल भीतर कभी नहीं।
यहाँ से शुरू करें
त्रिफला · Triphala
एक चम्मच त्रिफला चूर्ण रात को सोते समय गर्म पानी के साथ — यही सबसे सौम्य विधि है।
परंपरागत
सावधानीगर्भावस्था में नहीं। यह जुलाब का काम करता है, इसलिए लगातार लंबे समय तक नहीं।
नींबू · Lemon
आधे नींबू का रस एक गिलास गुनगुने पानी में सुबह खाली पेट, चाहें तो थोड़ा शहद मिलाकर।
परंपरागत
कासनी · Chicory
कासनी बीज चूर्ण प्रातः — परंपरा में यकृत के लिए, और यकृत-एंजाइम पर कुछ प्रमाण भी हैं। यह रक्त को शुद्ध नहीं करता — वह काम यकृत व गुर्दे स्वयं करते हैं।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
साप्ताहिक एक दिन रस-उपवास; सप्ताह में दो बार भाप-स्नान — त्वचा से निष्कासन।
तीन लीटर जल; स्नान से पहले सूखी मालिश।
शास्त्रीय औषधि
आरोग्यवर्धिनी वटी · Arogyavardhini Vati
मात्रा: 1–2 tablets (250 mg) · Warm water before food
यकृत की सुस्ती, यकृत-मेदोवृद्धि, पीलिया के बाद, स्थौल्य, पुराने त्वचा-रोग, अरुचि।