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घेंघा

गलगण्ड — चरक-वर्णित। गले की ग्रंथि का बढ़ना; थायरॉइड जाँच अनिवार्य।

घरेलू उपाय

मुख्य उपाय
कचनार की छाल का काढ़ा सुबह-शाम; आयोडीन की जाँच डॉक्टर से कराएँ। चरक का पथ्य: पुराना जौ, मूँग, हल्का भोजन।
कचनारजौमूँग दाल
कचनार · Kachnar
कचनार की छाल का काढ़ा — शास्त्रीय उपाय: 1 चम्मच छाल-चूर्ण एक कप जल में आधा रहने तक उबालें, सुबह-शाम। चरक ने गलगण्ड को ग्रीवा-शोथ में गिना है।
परंपरागत
जौ · Barley
पुराना जौ, मूंग व हल्का भोजन; गरिष्ठ, खट्टा व कफ-वर्धक भोजन वर्जित — गलगण्ड का शास्त्रीय पथ्य।
परंपरागत
मूँग दाल · Moong dal
भारी दालों की जगह मूँग — हल्की व कफ-हर, गलगंड में यही दाल कही गई है। पर थायरॉइड के लिए TSH जाँच आवश्यक है, केवल आहार से काम नहीं चलेगा।
परंपरागत
इस पन्ने पर
प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।

प्राकृतिक चिकित्सा

गर्दन के हल्के व्यायाम व गर्म सेक; थायरॉइड जाँच अवश्य कराएँ — वैद्य/डॉक्टर साथ में आवश्यक।

क्या खाएँ

जौ · Barleyमूँग दाल · Moong dal

क्या घटाएँ

दही · Curdभारी तला भोजन · Heavy fried foodखट्टा भोजन · Sour food

अपनी रसोई की चीज़ें चुनकर देखें कौन-सा उपाय आपके लिए सही है।

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