गुनगुना तिल का तेल प्रभावित अंग पर हथेली से मालिश करें, बीस मिनट रखकर गर्म पानी से स्नान करें।
परंपरागत
घी · Ghee
1 चम्मच गर्म गाय का घी खाली पेट या रात को गर्म दूध में मिलाकर लें — यह अन्य औषधियों को धातुओं तक पहुँचाता है।
परंपरागत
ब्राह्मी · Brahmi
आधा चम्मच ब्राह्मी चूर्ण रात को गर्म दूध या शहद के साथ; या सुबह 4-5 ताज़ी पत्तियाँ चबाएँ।
परंपरागत
सावधानीथायरॉइड की दवा और नींद की दवा के साथ सावधानी — दोनों का असर बदल सकता है।
हल्दी · Turmeric
आधा चम्मच हल्दी एक कप गर्म दूध या गर्म पानी में, दिन में एक-दो बार। साथ में चुटकी काली मिर्च लेने से अवशोषण बढ़ता है।
परंपरागत
सावधानीरसोई में डाली जाने वाली मात्रा सुरक्षित है। गोली या सत्व के रूप में ज़्यादा मात्रा ख़ून पतला करने वाली दवाओं के साथ नहीं। पित्ताशय में पथरी हो तो ज़्यादा मात्रा से बचें। सर्जरी से पहले बंद करें।
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
दिन में दो बार आठ बार भ्रामरी — गुंजन सीधे कान पर कार्य करता है।
तेज़ ध्वनि व कैफ़ीन से बचें; गर्दन की जकड़न का उपचार करें।
शास्त्रीय औषधि
क्षीरबला तेल · Ksheerabala Oil
मात्रा: External; internal only on advice · Warm and massage the head or affected part
सिरदर्द व अधकपारी, अनिद्रा, स्नायु-शूल, अंगों की दुर्बलता, ज्वर के बाद अंग-पीड़ा।
अणु तैल · Anu Taila
मात्रा: 2 drops in each nostril · Lie back, instil, sniff gently — morning, empty stomach
शास्त्रीय नस्य तैल: पुराना साइनस, सिरदर्द, गंध-लोप, नासा-शोष, अकाल पलित्य, स्वर-दौर्बल्य।
क्या खाएँ
तिल का तेल · Sesame oilघी · Gheeब्राह्मी · Brahmiहल्दी · Turmeric
अपनी रसोई की चीज़ें चुनकर देखें कौन-सा उपाय आपके लिए सही है।