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परिवर्तिनी एकादशी — पूरी विधि

दस पर्चे। इस दिन अन्न नहीं, संयम का भोग लगता है — और व्रत दशमी की रात से शुरू होता है।

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1 / 10 · परिचय

परिवर्तिनी एकादशी — 22 सितंबर 2026

अन्न नहीं, संयम का भोग।

भाद्रपद शुक्ल एकादशी। चातुर्मास में योग-निद्रा में लेटे विष्णु आज करवट बदलते हैं — इसीलिए “परिवर्तिनी”; इसे पद्मा और जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं।

बाक़ी विधि हर एकादशी की एक है, इसलिए ये पर्चे महीने में दो बार काम आएँगे।

अगली एकादशी: इंदिरा एकादशी, 6 अक्टूबर 2026 (पितृपक्ष में)।
2 / 10 · कथा

राजा अम्बरीष और सुदर्शन चक्र

राजा अम्बरीष ने एकादशी का व्रत निष्ठा से किया। दुर्वासा ऋषि के क्रोध से उन्हें बचाने स्वयं सुदर्शन चक्र आया।

तब से यह तिथि विष्णु को सबसे प्रिय है — इसमें अन्न नहीं, संयम का भोग लगता है।

कथा का सार वैसा ही, जैसा भोजनवेद के व्रत कार्ड पर है।
3 / 10 · सामग्री

पूजा की सामग्री

  • विष्णु / लड्डू गोपाल की प्रतिमा या चित्र
  • पीले फूल, पीला चंदन, पीला वस्त्र
  • तुलसी-दल — एक दिन पहले तोड़े हुए
  • पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
  • केला, नारियल, अक्षत
  • धूप-दीप; भोग के लिए गुड़ या खीर
तुलसी रानी की सलाह: एकादशी को तुलसी तोड़ना मना है — पत्ते एक दिन पहले तोड़कर जल में रख लें, ताज़े रहेंगे।
4 / 10 · दशमी

व्रत एक रात पहले शुरू होता है

दशमी की रातसात्विक, हल्का भोजन — समय से। लहसुन-प्याज़, मसूर, बैंगन नहीं
एकादशी प्रातःस्नान, पीले वस्त्र, व्रत का संकल्प
संकल्पहाथ में जल-अक्षत लेकर: “मैं आज विष्णु-प्रीत्यर्थ एकादशी व्रत करूँगा/करूँगी”

सुबह भूखा पेट नहीं, तैयार पेट — यही दशमी की रात का अर्थ है।

5 / 10 · पूजा

पूजा के चरण

  • विष्णु का पंचामृत से अभिषेक, फिर शुद्ध जल से
  • पीला चंदन, पीले फूल, और तुलसी-दल — तुलसी बिना भोग अपूर्ण
  • धूप-दीप; केला-नारियल और गुड़/खीर का भोग
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — 108 बार
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ, यथाशक्ति
6 / 10 · संध्या

संध्या दीपदान, रात्रि जागरण

संध्या को तुलसी के पास और पूजा-स्थान पर दीप जलाएँ; आरती — ॐ जय जगदीश हरे।

रात्रि में भजन-कीर्तन या जागरण की परंपरा है। न हो सके तो सोने से पहले मंत्र का एक माला जाप पर्याप्त है।

जागरण नींद तोड़ने का नियम नहीं, मन को हरि में रखने का है। बुज़ुर्ग और बीमार समय से सोएँ।
7 / 10 · आहार

आज क्या खाएँ, क्या नहीं

खाएँफल, दूध, दही, मेवा; साबूदाना, सिंघाड़ा, कुट्टू; सेंधा नमक
न खाएँअन्न, चावल, दाल; लहसुन-प्याज़; साधारण नमक; मसूर व बैंगन

व्रत निराहार नहीं है — फलाहार व्रत का हिस्सा है। दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा लें, पानी पूरा पिएँ।

8 / 10 · पारण

पारण द्वादशी को

कबद्वादशी को सूर्योदय के बाद, द्वादशी तिथि रहते-रहते
पहलेतुलसी-जल, फिर अन्न
अन्नदानब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराकर, तब स्वयं खाएँ

पहला भोजन हल्का रखें — खिचड़ी, दाल-चावल। बारह घंटे बाद तली थाली अग्नि पर भारी पड़ती है।

9 / 10 · सावधानी

किसे व्रत नहीं रखना

  • मधुमेह — दवा या इंसुलिन पर हों तो निर्जला या लंबा उपवास नहीं; फल-दूध लेते रहें
  • गर्भावस्था, स्तनपान — फलाहार व्रत ही, और पानी पूरा
  • नियमित दवा — दवा का समय व्रत से न टूटे
  • बुज़ुर्ग, बच्चे, बीमारी से उठे लोग — एक समय सात्विक भोजन ही व्रत है

व्रत साधना है, परीक्षा नहीं। चक्कर, पसीना, धड़कन — तुरंत कुछ मीठा लें और व्रत तोड़ दें।

यह चिकित्सा सलाह नहीं है। अपनी स्थिति अपने डॉक्टर से तय करें।
10 / 10 · एक नज़र में

एकादशी — एक नज़र में

  • दशमी की रात सात्विक
  • प्रातः स्नान, पीले वस्त्र, संकल्प
  • पंचामृत-अभिषेक, तुलसी, 108 मंत्र
  • फलाहार — अन्न, दाल, साधारण नमक नहीं
  • संध्या दीप; द्वादशी को पारण, खिलाकर

अन्न नहीं, संयम का भोग।

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क्षेत्र और कुल-परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है — तिथि और मुहूर्त की पुष्टि अपने पंचांग या पुरोहित से करें। मधुमेह, गर्भावस्था, या नियमित दवा पर हों तो व्रत से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें; निर्जला व्रत ऐसी स्थिति में न रखें। पूरा व्रत कार्ड — अगली तिथि, रिमाइंडर, मंत्र-जाप: bhojanveda.com/ekadashi