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प्रदोष व्रत — पूरी विधि

दस पर्चे। यह व्रत एक संध्या का है — सूर्यास्त से लगभग ढाई घंटे का प्रदोष काल।

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1 / 10 · परिचय

प्रदोष व्रत — 24 सितंबर 2026

प्रदोष का फल संध्या में है।

हर मास दो बार, त्रयोदशी तिथि को — शुक्ल और कृष्ण पक्ष में। इस बार गुरुवार पड़ने से यह गुरु प्रदोष है।

दादी की सलाह: “प्रदोष का पूरा फल संध्या में है, दिनभर भूखे रहने में नहीं।”

अगला प्रदोष: 8 अक्टूबर 2026।
2 / 10 · कथा

हलाहल की संध्या

समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने त्रयोदशी की संध्या में कंठ में धारण किया — जग बच गया, शिव नीलकंठ हुए।

देवताओं ने उसी प्रदोष काल में उनकी स्तुति की — तभी से यह समय शिव-पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त माना गया।

3 / 10 · समय

प्रदोष काल क्या है

कबसूर्यास्त से लगभग ढाई घंटे — गोधूलि से रात के पहले पहर तक
तैयारीसूर्यास्त से डेढ़ घंटा पहले स्नान कर तैयार
चौकीसूर्यास्त से पहले सजा लें — पूजा ठीक प्रदोष काल में शुरू हो

सूर्यास्त का समय अपने शहर के पंचांग से देखें; सितंबर में उत्तर भारत में लगभग छह-सवा छह बजे।

4 / 10 · सामग्री

पूजा की सामग्री

  • शिवलिंग या शिव-चित्र
  • जल, गंगाजल, कच्चा दूध; दही, घी, शहद
  • बेलपत्र (तीन पत्ती वाले, साबुत), सफ़ेद फूल
  • भस्म, सफ़ेद चंदन, अक्षत
  • धतूरा (क्षेत्रानुसार), धूप-दीप
  • प्रसाद: फल, मिश्री, मेवा
5 / 10 · दिन

दिनभर फलाहार

प्रातःस्नान, व्रत का संकल्प
दिन मेंफल, दूध, नारियल पानी, मेवा; सेंधा नमक
नहींअन्न व दाल, लहसुन-प्याज़, तला-भुना, मांस-मदिरा

दिनभर भूखे रहना व्रत का नियम नहीं है — संध्या की पूजा के लिए शरीर में बल रहे, यही नियम है।

6 / 10 · अभिषेक

प्रदोष काल में अभिषेक

  • पहले जल, फिर कच्चा दूध, फिर पंचामृत — दही, घी, शहद
  • अंत में फिर शुद्ध जल या गंगाजल — शिवलिंग स्वच्छ रहे
  • अभिषेक करते हुए ॐ नमः शिवाय बोलते रहें

घर में शिवलिंग न हो तो शिव-चित्र के सामने कलश के जल से यही क्रम — भाव वही है।

7 / 10 · अर्पण

बेलपत्र, चिकनी ओर नीचे

  • बेलपत्र की चिकनी ओर शिवलिंग की तरफ़, डंठल अपनी ओर
  • तीन पत्ती वाला, कटा-फटा नहीं; धोकर चढ़ाएँ
  • सफ़ेद फूल, भस्म, सफ़ेद चंदन, अक्षत
  • धतूरा जहाँ परंपरा हो

बेल आयुर्वेद में भी औषधि है — कसैला, आँतों को बाँधने वाला। जिसे शिव को चढ़ाते हैं, वही पेट की दवा है।

बेलपत्र न मिले तो केवल जल और मंत्र से पूजा पूरी मानी जाती है — शिव को भाव चाहिए, सामग्री नहीं।
8 / 10 · जाप-आरती

मंत्र, कथा, आरती

  • ॐ नमः शिवाय — 108 बार
  • प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें
  • शिव आरती — ॐ जय शिव ओंकारा, धीमी और गंभीर लय में
  • प्रसाद बाँटें
9 / 10 · पारण

पारण उसी रात

कबआरती के तुरंत बाद — अगले दिन की प्रतीक्षा नहीं
क्याप्रसाद, फिर सात्विक भोजन — खिचड़ी, दाल-रोटी, दूध
नहींतला-भुना, लहसुन-प्याज़

यही बात प्रदोष को बाक़ी व्रतों से अलग करती है: फल संध्या में मिल गया, रात भूखे नहीं रहना।

मधुमेह, गर्भावस्था या दवा पर हों तो दिन का फलाहार दो-तीन बार लें; यह चिकित्सा सलाह नहीं है।
10 / 10 · एक नज़र में

प्रदोष — एक नज़र में

  • प्रातः संकल्प, दिन में फलाहार
  • सूर्यास्त से डेढ़ घंटा पहले स्नान, चौकी तैयार
  • प्रदोष काल: जल-दूध-पंचामृत अभिषेक
  • बेलपत्र चिकनी ओर नीचे, सफ़ेद फूल, भस्म
  • 108 मंत्र, कथा, आरती — और उसी रात पारण

समय ही साधना है।

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क्षेत्र और कुल-परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है — तिथि और मुहूर्त की पुष्टि अपने पंचांग या पुरोहित से करें। मधुमेह, गर्भावस्था, या नियमित दवा पर हों तो व्रत से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें; निर्जला व्रत ऐसी स्थिति में न रखें। पूरा व्रत कार्ड — अगली तिथि, रिमाइंडर, मंत्र-जाप: bhojanveda.com/pradosh