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अंगारकी संकष्टी चतुर्थी — पूरी विधि

दस पर्चे। व्रत चंद्रोदय तक है, और चंद्र-अर्घ्य के बिना अधूरा — यही संकष्टी का पूरा नियम है।

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1 / 10 · परिचय

अंगारकी संकष्टी — 29 सितंबर 2026

मंगलवार की संकष्टी अंगारकी है।

हर मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी है; जब वह मंगलवार को पड़े, अंगारकी — साल में एक-दो बार। मान्यता है कि एक अंगारकी बारह संकष्टी के बराबर।

अंगारक यानी मंगल — इसीलिए आज गणेश के साथ हनुमान चालीसा भी।
2 / 10 · कथा

संकट हरने वाली

संकष्टी का अर्थ है संकट हरने वाली। गणेश जी ने इसी तिथि पर भक्तों को वचन दिया कि जो चंद्रोदय तक व्रत रखकर उन्हें दूर्वा अर्पित करेगा, उसका विघ्न वे स्वयं उठा लेंगे।

और चाँद की कथा: मूषक से गिरे गणेश पर चंद्रमा हँसा, शाप मिला; बाद में नरमी हुई — पर संकष्टी आज भी चंद्र-अर्घ्य से ही पूरी होती है।

3 / 10 · सामग्री

पूजा की सामग्री

  • गणेश प्रतिमा या चित्र
  • दूर्वा-दल — इक्कीस, तीन पत्ती वाले
  • मोदक या लड्डू — गुड़-नारियल के
  • सिंदूर, लाल फूल, अक्षत
  • केला, धूप-दीप, जल-कलश (अर्घ्य के लिए)
मूंग मौसी की सलाह: दूर्वा हमेशा इक्कीस की गिनती में और तीन पत्ती वाली; मोदक में गुड़-नारियल, चीनी नहीं।
4 / 10 · दिन

प्रातः से चंद्रोदय तक

प्रातःस्नान, व्रत का संकल्प — “चंद्रोदय तक”
दिन मेंफल, दूध, मेवा, साबूदाना; सेंधा नमक — अन्न, दाल, साधारण नमक नहीं
मंगलहनुमान चालीसा; ॐ अं अंगारकाय नमः

चंद्रोदय आज रात लगभग नौ बजे के आसपास है — लंबा दिन। फल-दूध लेते रहें, निर्जला नहीं।

5 / 10 · संध्या

संध्या की पूजा

  • चौकी पर लाल वस्त्र, गणेश-स्थापना; धूप-दीप
  • इक्कीस दूर्वा — गिनकर, एक-एक कर
  • सिंदूर, लाल फूल, अक्षत
  • मोदक या लड्डू का भोग; केला
  • ॐ गं गणपतये नमः — 108 बार
6 / 10 · मोदक

भोग: भाप का मोदक

आवरणचावल का आटा, गरम पानी में गूँधा
भरनगुड़ और ताज़ा नारियल, थोड़ी इलायची — चीनी नहीं
पकानाभाप में दस-बारह मिनट; तला नहीं

भाप का मोदक भादों की उमस में हल्का रहता है और वर्षा-शरद का पुराना बल-आहार है।

इक्कीस मोदक न बन सकें तो इक्कीस लड्डू, या एक मोदक और इक्कीस दूर्वा — गिनती दूर्वा की है।
7 / 10 · आरती-कथा

आरती और संकष्टी कथा

  • संकष्टी व्रत कथा सुनें या पढ़ें
  • आरती — जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
  • अंगारकी को हनुमान जी की आरती भी — आरती कीजै हनुमान लला की

फिर चंद्रोदय की प्रतीक्षा — पूजा पूरी, पर व्रत अभी नहीं।

8 / 10 · अर्घ्य

चंद्रोदय पर अर्घ्य

  • चाँद निकलते ही कलश के जल में दूध, अक्षत और फूल मिलाकर अर्घ्य
  • गणेश को स्मरण करते हुए: “ॐ गं गणपतये नमः”; चंद्रमा को प्रणाम
  • बादल हों तो चंद्रोदय के समय दिशा की ओर अर्घ्य — व्रत पूरा माना जाता है

चंद्रदर्शन के बिना व्रत अधूरा है — यही संकष्टी को बाक़ी गणेश-व्रतों से अलग करता है।

9 / 10 · पारण-दान

पारण और मंगल का दान

पारणअर्घ्य के बाद प्रसाद — मोदक — फिर सात्विक भोजन
दानमसूर दाल व गुड़ — मंगलवार का दान; गुड़-चना हनुमान जी को
नहींलहसुन-प्याज़, मांस-मदिरा, बासी भोजन
मधुमेह, गर्भावस्था या दवा पर हों तो चंद्रोदय तक का लंबा व्रत नहीं — फलाहार दो-तीन बार लें। यह चिकित्सा सलाह नहीं है।
10 / 10 · एक नज़र में

संकष्टी — एक नज़र में

  • प्रातः संकल्प, दिन में फलाहार — निर्जला नहीं
  • संध्या: इक्कीस दूर्वा, सिंदूर, गुड़-नारियल का मोदक, 108 मंत्र
  • आरती, कथा; अंगारकी को हनुमान चालीसा
  • चंद्रोदय पर अर्घ्य — तब पारण
  • दान: मसूर दाल व गुड़

संकट हरो, गणराज।

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क्षेत्र और कुल-परंपरा के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है — तिथि और मुहूर्त की पुष्टि अपने पंचांग या पुरोहित से करें। मधुमेह, गर्भावस्था, या नियमित दवा पर हों तो व्रत से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें; निर्जला व्रत ऐसी स्थिति में न रखें। पूरा व्रत कार्ड — अगली तिथि, रिमाइंडर, मंत्र-जाप: bhojanveda.com/sankashti