रात्रि भोजन में हल्की भाप दी हरी मटर एक कटोरी, जीरा व थोड़े घी के साथ — इसका रेशा आँतों को सौम्यता से चलाता रहता है।
परंपरागत
किशमिश · Raisins
दस मुनक्के रातभर पानी में भिगोकर प्रातः खाएँ और वही पानी पिएँ।
परंपरागत
शकरकंद · Sweet potato
रात्रि में उबली शकरकंद चुटकी सेंधा नमक के साथ लें।
परंपरागत
यहाँ से शुरू करें
आँवला · Amla
रात को एक चम्मच पिसा आँवला पानी या दूध से लेने से सुबह दस्त साफ आता है, कब्ज नहीं रहती। आँतें व पेट साफ रहते हैं।
परंपरागत
सेब · Apple
सुबह खाली पेट और शाम को भोजन के बाद एक सेब छिलके सहित खाएँ — कब्ज़ में आराम मिलता है। (कब्ज़ में छिलके सहित, दस्त में छिलका उतारकर।)
परंपरागत
जई · Oats
दलिया एक कटोरी रात्रि भोजन में, पर्याप्त जल के साथ। रेशा जल खींचकर मल मुलायम करता है।
परंपरागत
फलियाँ · Beans
राजमा या लोबिया एक कटोरी, हींग व अजवायन डालकर पकाएँ — हींग वायु नहीं बनने देती।
परंपरागत
अंजीर · Fig
दो-तीन सूखे अंजीर रातभर जल में भिगोकर प्रातः खाएँ, वही जल भी पिएँ। सबसे सौम्य व सुरक्षित रेचक।
परंपरागत
बेल · Bengal Quince
पका बेल का शरबत एक गिलास प्रातः — पका फल मल साफ़ करता है, कच्चा रोकता है।
परंपरागत
गुलाब · Rose
गुलकंद एक चम्मच रात को गर्म दूध के साथ — सौम्य व शीतल रेचक।
परंपरागत
अलसी · Linseed
अलसी एक चम्मच, एक गिलास जल के साथ रात को। पर्याप्त जल आवश्यक है, अन्यथा उलटा प्रभाव।
परंपरागत
शहतूत · Mulberry
पके शहतूत एक कटोरी प्रातः — सौम्य रेचक।
परंपरागत
नींबू-शहद जल · Lemon-honey warm water
आधे नींबू का रस व एक चम्मच शहद एक गिलास गुनगुने पानी में, सुबह सबसे पहले खाली पेट — यह रेचक नहीं, आँत को चलाकर काम करता है। पीने के बाद थोड़ा टहलें।
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त्रिफला जल · Triphala warm water
रात में 1 चम्मच त्रिफला एक कप गुनगुने पानी में — सुबह तक सौम्य ढंग से काम करता है, और रेचक की तरह आँत को आलसी नहीं बनाता। गर्भावस्था में न लें।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
जागते ही दो गिलास गुनगुना पानी पिएँ, फिर कुछ मिनट उकड़ू बैठें। पेट पर दक्षिणावर्त पाँच मिनट मालिश। पवनमुक्तासन व मलासन का अभ्यास।
पुरानी अवस्था में सप्ताह में एक बार गुनगुने जल का एनिमा; रात्रि में पेट पर गीली पट्टी।