आम: आम की गुठली, बेलगिरी और मिश्री समान मात्रा में पीसकर दो-दो चम्मच नित्य तीन बार पानी के साथ लें। केला आसानी से पचता है और दस्तों को स्थिर करता है। भूरे चावल पाचन को शांत करते हैं। गर्मी के दस्तों में अधिक लाभ होता है।
आम की गुठली, बेलगिरी और मिश्री समान मात्रा में पीसकर दो-दो चम्मच नित्य तीन बार पानी के साथ लें। गर्मी के दस्तों में अधिक लाभ होता है।
परंपरागत
केला · Banana
एक पका केला चुटकी इलायची के साथ अच्छी तरह चबाकर — भोजन के बीच, भरे पेट पर नहीं।
परंपरागत
ब्राउन चावल · Brown rice
एक छोटी कटोरी अच्छी तरह पका भूरा चावल, नरम व गर्म, एक चम्मच घी के साथ।
परंपरागत
बेल · Bengal Quince
कच्चे बेल का गूदा भूनकर, एक चम्मच छाछ के साथ, दिन में दो बार। पका बेल न लें — वह रेचक है।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
आँतों को पूर्ण विश्राम — एक दिन केवल गुनगुना जल व माँड़। पेट पर ठंडी पट्टी।
खोया जल भरने हेतु निरंतर घूँट लें; शमन तक ठोस आहार त्याग।
शास्त्रीय औषधि
दाडिमाष्टक चूर्ण · Dadimashtaka Churna
मात्रा: 2–4 g · Warm water or buttermilk
अतिसार, प्रवाहिका, रोग के बाद मंदाग्नि, शूल।
जातिफलादि चूर्ण · Jatiphaladi Churna
मात्रा: 0.5–2 g · Honey or warm milk
पतले दस्त, मंदाग्नि, स्नायु-अशांति, नींद न आना।
कुटजारिष्ट · Kutajarishta
मात्रा: 15–30 ml · Equal warm water twice daily
पुराना अतिसार, आम या रक्त-युक्त प्रवाहिका, ग्रहणी, ढीले मल के साथ आँत-विकार।
जीरकाद्यारिष्ट · Jeerakadyarishta
मात्रा: 15–30 ml · Equal warm water after meals
प्रसव के बाद का पाचक बल्य। मंदाग्नि, वायु, प्रसव के बाद ढीला मल, दुग्ध-अल्पता।
क्या खाएँ
आम · Mangoकेला · Bananaब्राउन चावल · Brown riceबेल · Bengal Quince
क्या घटाएँ
तला-भुना · Fried foodsदूध · Milk
अपनी रसोई की चीज़ें चुनकर देखें कौन-सा उपाय आपके लिए सही है।