गिलोय की चार इंच डंडी दो कप पानी में उबालकर एक कप बचाएँ; गुनगुना खाली पेट लें।
परंपरागत
आँवला · Amla
एक ताज़ा आँवला, या एक चम्मच आँवला चूर्ण ठंडे पानी में रोज़ सुबह — दूध के साथ न लें।
परंपरागत
शहद · Honey
एक चम्मच कच्चा शहद सीधे या गुनगुने पानी में लें — गर्म पानी में कभी न डालें, गुण नष्ट होते हैं।
परंपरागत
सावधानीएक साल से छोटे बच्चे को शहद कभी नहीं — बोटुलिज़्म का ख़तरा। यह नियम बिना अपवाद है।
नींबू घास · Lemongrass
लेमनग्रास का काढ़ा दिन में दो बार — स्वेद लाकर ताप उतारता है।
परंपरागत
गिलोय काढ़ा · Giloy kadha
दिन में एक बार गिलोय काढ़ा — शास्त्रोक्त ज्वरहर, और लंबे बुख़ार से आई कमज़ोरी में भी लाभ। दो सप्ताह से अधिक का बुख़ार तेज़ काढ़ा नहीं, रक्त-जाँच माँगता है।
परंपरागत
तुलसी काढ़ा · Tulsi kadha
दिन में दो बार — ज्वरहर, और बदन-दर्द में राहत। हफ़्तों तक लौट-लौटकर आने वाले बुख़ार में मलेरिया, टाइफॉइड व टीबी की जाँच अवश्य कराएँ।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
दिन में दो बार ठंडा स्पंज; ज्वर उतरने पर थोड़ा सूर्य-स्नान।
बल लौटने तक हल्का फलाहार।
शास्त्रीय औषधि
गुडूची सत्व · Guudchi Satva
घटक: Guudchi extract, mineral salts, turmeric
सुदर्शन चूर्ण · Sudarshan Churna
मात्रा: 1–3 g · Warm water or honey
पुराना ज्वर, मलेरिया, ज्वर में अरुचि, यकृत की सुस्ती।
महासुदर्शन चूर्ण · Mahasudarshan Churna
मात्रा: 1–3 g · Warm water or honey, twice daily
कोई भी न उतरने वाला ज्वर — मलेरिया, मोतीझरा, विषम ज्वर, यकृत-युक्त ज्वर, ज्वर में अरुचि।
दशमूलारिष्ट · Dashamularishta
मात्रा: 15–30 ml · Equal warm water twice daily
प्रसव के बाद का शास्त्रीय बल्य। सामान्य दुर्बलता, कटि-शूल, वात-रोग, ज्वर के बाद स्वास्थ्य-लाभ में भी।