हल्दी-शहद का लेप ऊपर से लगाएँ। नीम भीतर लेने से जीवाणु घटते हैं — मुँहासों में लाभ इसी से है, रक्त शुद्ध होने से नहीं। नीम के पत्तों का लेप लगाकर बीस मिनट बाद धो लें, सप्ताह में तीन बार। हल्दी चंदन व गुलाब जल के साथ शरीर के लेप की तरह। सुबह आँवले का रस लें। त्वचा पर आँवला चूर्ण पानी में मिलाकर पतला लेप दस मिनट — यह कसता व सुखाता है, इसलिए केवल तैलीय हिस्सों पर।
नीम पत्ते का लेप बीस मिनट बाद धो लें — सप्ताह में तीन बार।
परंपरागत
सावधानीगर्भावस्था में और गर्भधारण की कोशिश में नीम खाना नहीं। छोटे बच्चों को नीम का तेल भीतर कभी नहीं।
यहाँ से शुरू करें
हल्दी · Turmeric
हल्दी, चंदन व गुलाब जल का लेप शरीर पर लगाएँ।
परंपरागत
सावधानीरसोई में डाली जाने वाली मात्रा सुरक्षित है। गोली या सत्व के रूप में ज़्यादा मात्रा ख़ून पतला करने वाली दवाओं के साथ नहीं। पित्ताशय में पथरी हो तो ज़्यादा मात्रा से बचें। सर्जरी से पहले बंद करें।
आँवला · Amla
सुबह आँवला रस लें। त्वचा पर आँवला चूर्ण पानी में पतला लेप दस मिनट — यह कसता व सुखाता है, इसलिए केवल तैलीय हिस्सों पर।
परंपरागत
शहद · Honey
केवल दाने पर कच्चे शहद की थपकी, बीस मिनट, गुनगुने पानी से धोएँ। यह सुखाए बिना शांत करता है — अधिकांश उपाय ऐसा नहीं करते।
परंपरागत
सावधानीएक साल से छोटे बच्चे को शहद कभी नहीं — बोटुलिज़्म का ख़तरा। यह नियम बिना अपवाद है।
नींबू · Lemon
एक भाग नींबू में तीन भाग पानी, पीछे छूटे दाग पर — ताज़े दाने पर नहीं। धो लें, और उसके बाद धूप नहीं।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
ठंडा साफ़ जल, साबुन नहीं। सप्ताह में दो बार भाप, फिर ठंडे छींटे।