हल्दी शास्त्रीय व्रण-चूर्ण है — पर साफ़ व बंद घाव पर, खुले पर नहीं, जहाँ खुला चूर्ण मैल भीतर ले जा सकता है। पहले धोएँ, फिर पतला लेप, फिर ढँकें।
परंपरागत
सावधानीरसोई में डाली जाने वाली मात्रा सुरक्षित है। गोली या सत्व के रूप में ज़्यादा मात्रा ख़ून पतला करने वाली दवाओं के साथ नहीं। पित्ताशय में पथरी हो तो ज़्यादा मात्रा से बचें। सर्जरी से पहले बंद करें।
शहद · Honey
अस्पतालों में घाव की पट्टी पर चिकित्सा-श्रेणी का शहद लगता है; रसोई का डिब्बा वह नहीं है और रोगाणुरहित नहीं। डॉक्टर कहे तभी लगाएँ, वरना खाने तक रखें।
परंपरागत
सावधानीएक साल से छोटे बच्चे को शहद कभी नहीं — बोटुलिज़्म का ख़तरा। यह नियम बिना अपवाद है।
घी · Ghee
भोजन में एक चम्मच शरीर को नई कोशिका बनाने की सामग्री देता है। घाव पर तभी, जब वह भर चुका हो — खुले घाव पर चिकनाई संक्रमण को भीतर रोक लेती है।
परंपरागत
तिल का तेल · Sesame oil
गुनगुना तिल का तेल प्रभावित अंग पर हथेली से मालिश करें, बीस मिनट रखकर गर्म पानी से स्नान करें।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
ठंडे साफ़ जल से धोएँ; थोड़ी देर धूप व हवा से भरना तेज़ होता है।
खुले घाव के आस-पास मिट्टी की पट्टी, घाव पर नहीं।
शास्त्रीय औषधि
कैशोर गुग्गुलु · Kaishore Guggulu
मात्रा: 2–4 tablets (500 mg) · Warm water after food
वातरक्त, यूरिक एसिड, संधि-दाह, रक्त-दुष्टि, पुरानी पीड़िका, कण्डू, न भरने वाले व्रण।
त्रिफला गुग्गुलु · Triphala Guggulu
मात्रा: 2–4 tablets (500 mg) · Warm water at bedtime
अर्श, भगंदर, परिकर्तिका, कब्ज़ के साथ स्थौल्य, मेद-चयापचय की सुस्ती, न भरने वाले घाव।
क्या खाएँ
हल्दी · Turmericशहद · Honeyघी · Gheeतिल का तेल · Sesame oil
अपनी रसोई की चीज़ें चुनकर देखें कौन-सा उपाय आपके लिए सही है।