आधा चम्मच शहद + चुटकी कालीमिर्च चाटें, दिन में दो-तीन बार — चिपचिपा कफ़ ढीला होकर निकलता है। गरम पानी में शहद न डालें।
परंपरागत
सावधानीएक साल से छोटे बच्चे को शहद कभी नहीं — बोटुलिज़्म का ख़तरा। यह नियम बिना अपवाद है।
अदरक · Ginger
अदरक-तुलसी-कालीमिर्च का काढ़ा सुबह-शाम पिएँ; सोंठ-शहद रात को।
परंपरागत
सावधानीख़ून पतला करने वाली दवा के साथ ज़्यादा मात्रा नहीं। सर्जरी से पहले बंद करें।
मुलेठी · Mulethi
मुलेठी का टुकड़ा चूसें या ¼ चम्मच चूर्ण शहद से — गला साफ़, आवाज़ खुलती है।
परंपरागत
सावधानीरक्तचाप बढ़ाती है और शरीर का पोटैशियम घटाती है। बीपी, हृदय या गुर्दे की बीमारी हो तो नहीं। लगातार कुछ हफ़्तों से ज़्यादा नहीं।
अजवाइन · Ajwain
अजवायन की भाप दिन में एक बार — जमा कफ़ पिघलता है; रात को अजवायन की पोटली से छाती की सेंक।
परंपरागत
हल्दी · Turmeric
रात को हल्दी-दूध (चुटकी कालीमिर्च संग) पिएँ — गले-छाती की सूजन घटती है।
परंपरागत
सावधानीरसोई में डाली जाने वाली मात्रा सुरक्षित है। गोली या सत्व के रूप में ज़्यादा मात्रा ख़ून पतला करने वाली दवाओं के साथ नहीं। पित्ताशय में पथरी हो तो ज़्यादा मात्रा से बचें। सर्जरी से पहले बंद करें।
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।