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साँस के व्यायाम

साँस फूलने पर घबराहट साँस को और तेज़ करती है — ये तरीक़े उस चक्र को तोड़ते हैं।

कैसे करेंये व्यायाम साँस की दवा की जगह नहीं लेते। दमे का दौरा पड़ने पर पहले अपना इनहेलर लें — साँस के व्यायाम रोज़ के अभ्यास के लिए हैं, दौरे के इलाज के लिए नहीं।
ये हों तो व्यायाम नहीं, डॉक्टर
पेट से साँस
Belly breathing
  1. लेट जाएँ या सहारे से बैठें, एक हाथ छाती पर, एक पेट पर।
  2. नाक से धीरे साँस लें — पेट वाला हाथ उठे, छाती वाला लगभग स्थिर रहे।
  3. मुँह से धीरे छोड़ें, पेट भीतर जाए।
  4. साँस लेने से दुगुने समय में छोड़ें।
कहाँ महसूस हो: पेट का उठना-गिरना; कंधे शांत।
5–10 मिनट, दिन में दो बार
सिकुड़े होंठों से साँस
Pursed-lip breathing
  1. नाक से दो गिनती में साँस लें।
  2. होंठ ऐसे सिकोड़ें जैसे मोमबत्ती बुझा रहे हों।
  3. चार गिनती में धीरे-धीरे छोड़ें।
  4. जब साँस फूले तब यही करें — यह हवा को फेफड़ों में फँसने से रोकता है।
कहाँ महसूस हो: साँस का धीमा और क़ाबू में आना।
जब भी साँस फूले
गिनती के साथ चलना और सीढ़ी
Paced walking and stairs
  1. चलते समय साँस को क़दमों से जोड़ें — दो क़दम में लें, चार में छोड़ें।
  2. सीढ़ी पर: नीचे खड़े होकर साँस लें, फिर छोड़ते हुए दो सीढ़ी चढ़ें।
  3. रुकना हो तो रुकें, पर साँस की गिनती चलती रहे।
  4. धीरे-धीरे दूरी बढ़ाएँ, रफ़्तार नहीं।
कहाँ महसूस हो: साँस फूलने पर भी क़ाबू का बना रहना।
रोज़, बढ़ाते हुए
बलगम निकालने की हुफ़
Huffing to clear phlegm
  1. आराम से बैठें और तीन-चार बार पेट से साँस लें।
  2. एक गहरी साँस लें।
  3. मुँह खुला रखकर 'हा' की तरह ज़ोर से हवा बाहर फेंकें — खाँसी नहीं, हुफ़।
  4. दो-तीन हुफ़, फिर एक खाँसी। बीच में आराम करें।
कहाँ महसूस हो: बलगम का ऊपर की ओर सरकना।
दिन में दो बार, ज़रूरत पर

साथ में

अगर आप बीड़ी-सिगरेट पीते हैं, तो उसे छोड़ना इन सब व्यायामों से मिलकर भी ज़्यादा असर करता है — यह इस पन्ने की सबसे ज़रूरी बात है।

किन तकलीफ़ों के लिए

इन्हें भी देखें