आधा चम्मच हल्दी एक कप गर्म दूध या गर्म पानी में, दिन में एक-दो बार। साथ में चुटकी काली मिर्च लेने से अवशोषण बढ़ता है।
परंपरागत
सावधानीरसोई में डाली जाने वाली मात्रा सुरक्षित है। गोली या सत्व के रूप में ज़्यादा मात्रा ख़ून पतला करने वाली दवाओं के साथ नहीं। पित्ताशय में पथरी हो तो ज़्यादा मात्रा से बचें। सर्जरी से पहले बंद करें।
तिल · Sesame
एक चम्मच काले तिल हल्का भूनकर चबाएँ, या गुड़ के साथ पीसकर छोटा लड्डू बनाकर रोज़ एक लें।
परंपरागत
घी · Ghee
1 चम्मच गर्म गाय का घी खाली पेट या रात को गर्म दूध में मिलाकर लें — यह अन्य औषधियों को धातुओं तक पहुँचाता है।
परंपरागत
नीम · Neem
4-5 कोमल नीम पत्तियाँ खाली पेट चबाएँ, या पत्तियों का काढ़ा बनाकर प्रभावित त्वचा धोएँ।
परंपरागत
सावधानीगर्भावस्था में और गर्भधारण की कोशिश में नीम खाना नहीं। छोटे बच्चों को नीम का तेल भीतर कभी नहीं।
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
रक्तस्राव के दिनों को छोड़ प्रतिदिन दस मिनट ठंडा कटि-स्नान; सर्वांगासन।
सप्ताह में दो बार पेट के निचले भाग पर मिट्टी की पट्टी।
शास्त्रीय औषधि
पुष्यानुग चूर्ण · Pushyanuga Churna
मात्रा: 3–6 g · Rice water or honey
अधिक या अनियमित रक्तस्राव, श्वेत-प्रदर, आर्तव के बाद दुर्बलता।
कांचनार गुग्गुलु · Kanchanar Guggulu
मात्रा: 2–4 tablets (500 mg) · Warm water twice daily