प्रतिरोध व भूख कम — हर संक्रमण पकड़ना, खाना न भाना।
अन्य नाम: immunity booster · रोग प्रतिरोधक क्षमता · इम्युनिटी · व्याधिक्षमत्व · vyadhikshamatva · बार-बार बीमार पड़ना
घरेलू उपाय
मुख्य उपाय
मौसमी: इसका रस पीने से रोग-निरोधक शक्ति व जीवनशक्ति बढ़ती है। इसमें क्षार तत्त्व होता है जो रक्त की अम्लता कम करता है, पेट की अम्लता कम होती है और भूख लगती है।
मशरूम (बटन/ऑयस्टर) में बीटा-ग्लूकैन व सेलेनियम होते हैं जो रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाते हैं — सप्ताह में 2-3 बार हल्का मशरूम सूप या सब्ज़ी।
परंपरागत
मौसमी · Sweet Lemon
इसका रस पीने से रोग-निरोधक शक्ति व जीवनशक्ति बढ़ती है। इसमें क्षार तत्त्व होता है जो रक्त की अम्लता कम करता है, पेट की अम्लता कम होती है और भूख लगती है।
परंपरागत
बेरीज़ · Berries
मौसमी बेर, शहतूत, फालसा — जो मिले, ताज़ा खाएँ। रंग जितना गहरा, प्रतिरोधक तत्व उतने अधिक।
परंपरागत
खट्टे फल · Citrus fruits
नींबू का रस गुनगुने जल में प्रातः, और दिन में एक खट्टा फल।
परंपरागत
आँवला चाय · Amla tea
रोज़ सुबह 1 चम्मच आँवला चूर्ण एक कप गुनगुने (उबलते नहीं) पानी में — उबालने से वही विटामिन-सी नष्ट हो जाता है जो काम करता है।
परंपरागत
आयुष क्वाथ · Ayush kwath
तुलसी, दालचीनी, सोंठ व काली मिर्च 4:2:2:1 में — 3 ग्राम 150 मि.ली. पानी में उबालकर, दिन में एक बार। आयुष मंत्रालय का योग: ऋतु भर रोज़ एक कप, सालभर नहीं।
परंपरागत
गिलोय काढ़ा · Giloy kadha
1 इंच गिलोय की डंडी 2 कप पानी में उबालकर आधा करें, दिन में एक बार, एक बार में दो सप्ताह तक — रसायन है, सालभर पीने की चीज़ नहीं। यकृत रोग हो या प्रतिरक्षा-दमन दवा चल रही हो तो न लें।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
प्रति प्रातः ठंडी रगड़-स्नान; नंगी पीठ पर बीस मिनट धूप।