आँवला: शीतल व पित्तनाशक होने से अम्लपित्त की प्रमुख औषधि है। दो चम्मच आँवले के रस में इतनी ही मिश्री मिलाकर पियें, या एक चम्मच चूर्ण प्रात: भूखे पेट पानी के साथ लें।
2 चम्मच ताज़ी दूर्वा (दूब) का रस थोड़ी मिश्री संग, प्रातः खाली पेट — जलन वाली अम्लता का शास्त्रीय पित्त-शामक।
परंपरागत
मिश्री · Mishri
मिश्री ठंडे पानी के साथ लें या धीरे-धीरे चूसें — जलन शांत होती है।
परंपरागत
पेठा · Ash gourd
खाली पेट आधा कप पेठे का रस — आमाशय की जलन शांत होती है।
परंपरागत
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आँवला · Amla
शीतल व पित्तनाशक होने से अम्लपित्त की प्रमुख औषधि है। दो चम्मच आँवले के रस में इतनी ही मिश्री मिलाकर पियें, या एक चम्मच चूर्ण प्रात: भूखे पेट पानी के साथ लें।
परंपरागत
आलू · Potatoes
कच्चे आलू का रस — आधा कप, भोजन से आधा घंटा पहले खाली पेट। आलू का क्षारीय गुण अम्ल को तुरंत शांत करता है।
परंपरागत
गुलाब · Rose
गुलकंद एक चम्मच रात को दूध के साथ, या गुलाब जल दो चम्मच ठंडे जल में। पित्त को शीतल करता है।
परंपरागत
इलायची चाय · Cardamom tea
2 हरी इलायची कूटकर एक कप गर्म पानी में, भोजन के बाद घूँट-घूँट — सोडा की तरह पलटकर जलन बढ़ाए बिना ठंडक देती है।
परंपरागत
सौंफ चाय · Fennel tea
भोजन के बाद 1 चम्मच सौंफ एक कप गर्म पानी में भिगोकर — अधिकांश पाचक मसालों से उलट यह शीतल है, इसीलिए अम्लपित्त में जँचती है।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
दिनभर ठंडा पानी घूँट-घूँट पिएँ; क्रोध या तनाव में भोजन न करें। संध्या भोजन से पहले बीस मिनट पेट पर ठंडी पट्टी।
प्रत्येक भोजन के बाद पाँच मिनट वज्रासन; शीतली प्राणायाम आठ बार।
शास्त्रीय औषधि
अविपत्तिकर चूर्ण · Avipattikar Churna
मात्रा: 3–6 g · Warm water
अम्लपित्त, सीने की जलन, अपच, कब्ज़।
यष्टिमधु चूर्ण · Yashtimadhu Churna
मात्रा: 1–3 g · Ghee, honey or cool milk
अम्लपित्त, आमाशय-शोथ, अल्सर, गले की खराश, सूखी खाँसी, स्वर-भंग।