भोजन बाद गैस, भारीपन व अपच रहने पर पाचन जगाने वाले किण्वित पेय।
घरेलू उपाय
मुख्य उपाय
मसाला छाछ, जलजीरा व कांजी जैसे किण्वित पेय जीवित प्रोबायोटिक व शीतल मसाले लिए होते हैं जो पेट शांत करते, गैस मिटाते व मंद भूख जगाते हैं। भोजन के साथ या बाद एक छोटा गिलास सबसे सौम्य पाचक है।
जीरा-राई से किण्वित पानी जो गैस व फुलाव मिटाता है — भोजन से पहले एक छोटा गिलास पिएँ।
परंपरागत
यहाँ से शुरू करें
मसाला छाछ · Spiced buttermilk
भोजन के बाद पतली मसाला छाछ — आयुर्वेद का श्रेष्ठ व सुरक्षित पाचक, शीतल व प्रोबायोटिक।
परंपरागत
पुदीना छाछ · Mint buttermilk
पुदीना व जीरा संग मथी छाछ — पेट शीतल व भारी भोजन के बाद ताज़गी देती है।
परंपरागत
कढ़ी पत्ता छाछ · Curry-leaf buttermilk
कढ़ी पत्ता व हींग के छौंक वाली छाछ — प्रोबायोटिक व अम्लता में लाभकारी।
परंपरागत
अदरक छाछ · Ginger buttermilk
कद्दूकस अदरक वाली छाछ — पेट को गर्म, गैस व मिचली में आराम।
परंपरागत
सावधानीख़ून पतला करने वाली दवा के साथ ज़्यादा मात्रा नहीं। सर्जरी से पहले बंद करें।
नमकीन लस्सी · Salted lassi
जीरा-नमक लस्सी — भारी भोजन के बाद पेट शांत व गर्मी में खोए लवण की पूर्ति करती है।
परंपरागत
मठा · Matha
दिनभर पिया जाने वाला बहुत पतला मसाला मठा — हल्का, शीतल व सतत पाचक।
परंपरागत
हरी मिर्च कांजी · Green-chilli kanji
तीखा किण्वित मिर्च जल — एक चम्मच मंद भूख जगाता है।
परंपरागत
दही सोडा · Curd soda cooler
मथी दही में सोडा व जीरा — पेट शांत करने वाला हल्का प्रोबायोटिक फ़िज़।
परंपरागत
जलजीरा · Probiotic jaljeera
हल्का किण्वित पुदीना-जीरा जल — शीतल, भूख जगाने वाला व पाचक।
परंपरागत
इमली-अदरक शरबत · Tamarind-ginger cooler
इमली व अदरक पका हल्का खट्टा किया — भूख जगाने वाला व पाचक।
परंपरागत
सावधानीख़ून पतला करने वाली दवा के साथ ज़्यादा मात्रा नहीं। सर्जरी से पहले बंद करें।
सौंफ जल · Fennel cooler
भिगो-हल्का किण्वित सौंफ — पेट शीतल व भोजन के बाद साँस ताज़ा करती है।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
छाछ वाले पेय दिन में सामान्य ताप पर लें — रात में या गर्म कभी नहीं।
अम्लता हो तो खटास हल्की रखें, व इन्हें सदा ताज़ा पिएँ।