आँत के अच्छे जीवाणु घटने पर — एंटीबायोटिक बाद, बार-बार पेट खराब होने पर।
घरेलू उपाय
मुख्य उपाय
कांजी, केफ़िर व तोरानी आँतों में बसे लाभकारी जीवाणुओं को फिर से बनाते हैं, जिससे पाचन, अवशोषण व समग्र स्वास्थ्य सुधरता है। इन्हें धीरे-धीरे शुरू करें व रोज़ एक छोटा गिलास लें।
खट्टा किण्वित काली गाजर पेय, पेट-हितकर जीवाणुओं से भरपूर — सर्दी में रोज़ एक छोटा गिलास पाचन सुधारता है।
परंपरागत
चुकंदर कांजी · Beetroot kanji
राई-जल में किण्वित चुकंदर — प्रोबायोटिक व रक्तवर्धक, गहरा लाल व हल्का खट्टा।
परंपरागत
राई कांजी · Mustard kanji
सबसे सरल कांजी — पिसी राई से किण्वित पानी; सशक्त प्रोबायोटिक जो पाचन जगाता है।
परंपरागत
चावल तोरानी · Rice torani
भिगोए चावल का खट्टा किण्वित पानी — सौम्य प्रोबायोटिक जो शरीर शीतल व पेट शांत करता है।
परंपरागत
जल केफ़िर · Water kefir
केफ़िर दानों व शक्कर-जल से बना हल्का फ़िज़ी किण्वित पेय — सौम्य, ताज़गीभरा व प्रोबायोटिक-भरपूर।
परंपरागत
दूध केफ़िर · Milk kefir
केफ़िर दानों से किण्वित दूध — दही से गाढ़ा व अधिक प्रोबायोटिक, पाचन पर सौम्य।
परंपरागत
टमाटर कांजी · Tomato kanji
मसालों संग किण्वित टमाटर — नमकीन प्रोबायोटिक पेय, खट्टा व भूख जगाने वाला।
परंपरागत
अनार केफ़िर · Pomegranate kefir
जल-केफ़िर से किण्वित अनार रस — रक्तवर्धक व प्रोबायोटिक।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
थोड़ी मात्रा से शुरू कर बढ़ाएँ, ताकि पेट बिना कष्ट अभ्यस्त हो।
किण्वन के समय केवल साफ़, सूखे चम्मच व ढके जार प्रयोग करें।