मौसम बदलते ही बीमार पड़ना — प्रतिरोधक क्षमता के आहार।
घरेलू उपाय
मुख्य उपाय
रोग-प्रतिरोध का बड़ा भाग आँतों में बसता है। कांजी जैसे किण्वित पेय व प्रोबायोटिक अंकुर उन अच्छे जीवाणुओं को पोषते हैं जो शरीर की रक्षा करते हैं — विशेषकर सर्दी में।
काली गाजर व चुकंदर राई के साथ पानी में कई दिन किण्वित — खट्टा प्रोबायोटिक पेय, सर्दी में रोग-प्रतिरोध बढ़ाता है।
परंपरागत
राई कांजी · Mustard kanji
किण्वित राई-जल पेय — तीखा व प्रोबायोटिक, पिसी राई किण्वन आरंभ करती है। आँतों के जीवाणु-संतुलन हेतु उत्तम।
परंपरागत
गुंद्रुक · Gundruk
हिमालयी किण्वित पत्तेदार साग, सुखाकर खट्टा सूप — लौह व प्रोबायोटिक से भरपूर।
परंपरागत
तोरानी · Torani
भिगोए चावल का खट्टा किण्वित पानी — एक चम्मच पाचन में सहायक व आँतों में लाभकारी जीवाणु देता है।
परंपरागत
इस पन्ने पर प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।
प्राकृतिक चिकित्सा
कांजी पीने से 3-4 दिन पहले बनाएँ; बर्तन को हल्की धूप में रखें व रोज़ साफ़ चम्मच से हिलाएँ।
अल्फाल्फा जैसे कच्चे अंकुर खाने से पहले भली-भाँति धोएँ, क्योंकि ये बिना पके खाए जाते हैं।