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स्त्री-स्वास्थ्य

स्त्री-स्वास्थ्य — माहवारी-हार्मोन संतुलन, कमज़ोरी की देखभाल।

घरेलू उपाय

मुख्य उपाय
अशोकारिष्ट 15–20 मि.ली. भोजन के बाद दो बार समान गुनगुने जल (अनुपान) के साथ; शतावरी चूर्ण 3–5 ग्राम दूध के साथ।
घीदूधशतावरी
घी · Ghee
1 चम्मच गर्म गाय का घी खाली पेट या रात को गर्म दूध में मिलाकर लें — यह अन्य औषधियों को धातुओं तक पहुँचाता है।
परंपरागत
दूध · Milk
सोने से पहले एक कप गर्म गाय का दूध उबालकर धीरे-धीरे पिएँ — नमक या खट्टी चीज़ के साथ न लें।
परंपरागत
शतावरी · Shatavari
एक चम्मच शतावरी चूर्ण एक कप गर्म दूध में, रात को एक बार।
परंपरागत
सावधानीहार्मोन से जुड़ी बीमारी (जैसे स्तन या बच्चेदानी की गाँठ) हो तो डॉक्टर से पूछकर।
इस पन्ने पर
प्रमाणित — इस तकलीफ़ में इस चीज़ पर मनुष्यों पर हुए अध्ययन मौजूद हैं। परंपरागत — परंपरा और अनुभव से चला आ रहा — इस तकलीफ़ के लिए आधुनिक प्रमाण सीमित हैं।
यह सब दूसरों के अनुभव, परंपरा और अब तक हुए अध्ययनों का संग्रह है — किसी एक व्यक्ति के लिए दी गई सलाह नहीं। अपने खानपान में कोई भी बदलाव करने से पहले, और ख़ासकर तब जब आप कोई दवा ले रहे हों, अपने आहार विशेषज्ञ या डॉक्टर से पूछ लें।

प्राकृतिक चिकित्सा

रक्तस्राव के दिनों को छोड़ प्रतिदिन दस मिनट ठंडा कटि-स्नान; सूर्य नमस्कार।
नित्य योग निद्रा; पर्याप्त निद्रा व धूप।

शास्त्रीय औषधि

शतावरी कल्प · Shatavari Kalpa
घटक: Shatavari, milk, honey, ghee, sesame oil
पुष्यानुग चूर्ण · Pushyanuga Churna
मात्रा: 3–6 g · Rice water or honey
अधिक या अनियमित रक्तस्राव, श्वेत-प्रदर, आर्तव के बाद दुर्बलता।
दशमूलारिष्ट · Dashamularishta
मात्रा: 15–30 ml · Equal warm water twice daily
प्रसव के बाद का शास्त्रीय बल्य। सामान्य दुर्बलता, कटि-शूल, वात-रोग, ज्वर के बाद स्वास्थ्य-लाभ में भी।
कुमार्यासव · Kumaryasava
मात्रा: 10–20 ml · Equal warm water after meals
अनियमित आर्तव, यकृत-प्लीहा वृद्धि, अरुचि, मंदाग्नि, उदर-गुल्म।

क्या खाएँ

घी · Gheeदूध · Milkशतावरी · Shatavari

अपनी रसोई की चीज़ें चुनकर देखें कौन-सा उपाय आपके लिए सही है।

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