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दाँत निकलवाना

अक़्ल दाढ़ या कोई भी दाँत — पहले चौबीस घंटे सबसे अहम

सबसे पहलेअस्पताल का डिस्चार्ज काग़ज़ और आपके सर्जन के निर्देश इस पन्ने से ऊपर हैं। यहाँ खानपान, आराम, दवाओं के असर और चेतावनी के लक्षण दिए गए हैं — घाव की पट्टी, वज़न उठाने की हद और काम पर लौटने का समय हर सर्जरी और हर सर्जन में अलग होता है, वह उन्हीं से पूछें।

1सर्जरी से पहले

जो तैयारी नतीजा बदल देती है।

इस सर्जरी में ख़ास
ख़ून पतला करने की दवा ले रहे हों तो ज़रूर बताएँ — इसमें रोज़ की एस्पिरिन भी शामिल है।
पहले से नरम खाना घर में रख लें और उस दिन कोई ज़रूरी काम न रखें।
हर सर्जरी पर लागू
डॉक्टर को क्या ज़रूर बताएँ
सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर को हर उस चीज़ की जानकारी चाहिए जो आप ले रहे हैं — दवा, आयुर्वेदिक चूर्ण, विटामिन, घरेलू क़ाढ़ा, सब।
क्या करें: लोग अक्सर आयुर्वेदिक और घरेलू चीज़ों को 'दवा' नहीं मानते और बताना छोड़ देते हैं। यही सबसे बड़ी चूक है। डिब्बे साथ ले जाएँ या फ़ोन से फ़ोटो खींच लें — नाम याद रखने से बेहतर है।

2सर्जरी के बाद

पहले दिनों और हफ़्तों में क्या उम्मीद रखें।

पहले चौबीस घंटे: कुल्ला न करें, थूकें नहीं, स्ट्रॉ से न पिएँ, धूम्रपान बिल्कुल नहीं। इनमें से कोई भी उस थक्के को हटा सकता है जो घाव भर रहा है — और उसके हटने पर होने वाला दर्द (ड्राई सॉकेट) बहुत तेज़ होता है।
गाल पर बाहर से बर्फ़ की सिंकाई — पहले दिन, बीस मिनट लगाकर बीस मिनट हटाकर। सूजन दूसरे-तीसरे दिन सबसे ज़्यादा होती है।
दूसरे दिन से गुनगुने नमक-पानी के हल्के कुल्ले, दिन में कई बार — ज़ोर से नहीं, बस मुँह में घुमाकर गिरा दें।
सिर ऊँचा रखकर सोएँ।

3खानपान

मरम्मत का कच्चा माल — और इस सर्जरी में क्या अलग है।

इस सर्जरी में ख़ास
पहला दिन ठंडा और नरम — दही, खिचड़ी, दाल का पानी, ठंडा दूध, मसला केला। बहुत गरम कुछ नहीं।
बीज, चावल के दाने और खुरदुरी चीज़ें कुछ दिन नहीं — वे गड्ढे में फँसते हैं।
दूसरी तरफ़ से चबाएँ।
हर सर्जरी पर लागू
मरम्मत के लिए प्रोटीन
घाव भरना असल में नया माँस बनाना है, और उसका कच्चा माल प्रोटीन है। सर्जरी के बाद शरीर को सामान्य से ज़्यादा चाहिए — ठीक उस समय जब भूख सबसे कम होती है।
क्या करें: हर भोजन में कुछ: दाल, राजमा, चना, दही, पनीर, अंडा, मछली, चिकन का सूप, मूँग, सत्तू, दूध। शाकाहारी हों तो दाल+चावल साथ खाएँ, दोनों मिलकर पूरा प्रोटीन बनाते हैं। गुर्दे की बीमारी हो तो प्रोटीन बढ़ाने से पहले डॉक्टर से पूछें।
थोड़ा-थोड़ा, बार-बार
एक भरी थाली सामने आते ही मन भर जाता है और कुछ नहीं खाया जाता। छह छोटी प्लेटों से दिन भर में कहीं ज़्यादा पेट में जाता है।
क्या करें: हर दो-तीन घंटे में कुछ। हर बार प्रोटीन का एक हिस्सा। तरल भी गिना जाए — दाल का पानी, सूप, छाछ, दूध, सत्तू का घोल। जब खाना मुश्किल हो, पीने वाली चीज़ें सबसे आसान रास्ता हैं।

4दवाओं के असर

बेहोशी, दर्द की दवा और एंटीबायोटिक के बाद जो होता है।

एंटीबायोटिक से दस्त
एंटीबायोटिक हानिकारक कीटाणुओं के साथ आँत के काम के जीवाणु भी साफ़ कर देती है, इसलिए कोर्स के दिनों में पतले दस्त आम हैं।
क्या करें: खाने के साथ दही या छाछ — पर एंटीबायोटिक की गोली से दो घंटे का अंतर रखें। चावल का माँड़, केला, खिचड़ी। पानी की कमी न होने दें, ज़रूरत हो तो ओआरएस। कोर्स अपने मन से बीच में न रोकें। दस्त पानी जैसे हों, साथ बुख़ार या ख़ून हो — तो यह घरेलू बात नहीं, डॉक्टर को दिखाएँ।
दर्द की दवा से क़ब्ज़
ट्रामाडोल, कोडीन या मॉर्फ़ीन जैसी तेज़ दर्द-निवारक आँतों की चाल धीमी कर देती हैं। सर्जरी के बाद यह लगभग सबके साथ होता है — यह किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं।
क्या करें: दिन भर घूँट-घूँट पानी। रात भीगी किशमिश, अंजीर या मुनक्का। सुबह ख़ाली पेट गुनगुना पानी। ईसबगोल पूरे गिलास पानी के साथ। और जैसे ही इजाज़त मिले, चलना शुरू करें — हिलना-डुलना आँत को सबसे तेज़ जगाता है। मल नरम करने वाली दवा के लिए डॉक्टर से पहले ही पूछ लें, क़ब्ज़ जमने के बाद नहीं।
दवाओं के बाद भूख न लगना
बेहोशी, दर्द की दवा और एंटीबायोटिक मिलकर एक-दो हफ़्ते भूख दबा देते हैं। ठीक उसी समय शरीर को मरम्मत के लिए सबसे ज़्यादा खाने की ज़रूरत होती है।
क्या करें: एक बार में कम, पर दिन में छह बार। हर बार कुछ प्रोटीन — दाल, दही, पनीर, अंडा, सत्तू। खाने से पहले जीरा या अजवाइन का पानी। खट्टा स्वाद भूख खोलता है — नींबू, आँवला, अनार। ज़बरदस्ती एक बड़ी थाली से छह छोटी प्लेटें बेहतर हैं।

5शरीर में बदलाव

त्वचा, बाल और वे बदलाव जिनकी कोई चेतावनी नहीं देता।

इन पर घरेलू उपाय नहीं, डॉक्टर

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