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मोतियाबिंद की सर्जरी

भारत की सबसे आम सर्जरी — आधे घंटे की, पर बाद के नियम सख़्त

सबसे पहलेअस्पताल का डिस्चार्ज काग़ज़ और आपके सर्जन के निर्देश इस पन्ने से ऊपर हैं। यहाँ खानपान, आराम, दवाओं के असर और चेतावनी के लक्षण दिए गए हैं — घाव की पट्टी, वज़न उठाने की हद और काम पर लौटने का समय हर सर्जरी और हर सर्जन में अलग होता है, वह उन्हीं से पूछें।

1सर्जरी से पहले

जो तैयारी नतीजा बदल देती है।

इस सर्जरी में ख़ास
शुगर और बीपी क़ाबू में होने चाहिए — बेक़ाबू शुगर सर्जरी टलवा सकती है।
प्रोस्टेट की कुछ दवाएँ (टैम्सुलोसिन जैसी) आँख की सर्जरी को मुश्किल बनाती हैं। ले रहे हों तो ज़रूर बताएँ, भले बरसों पहले ली हो।
घर लौटने के लिए किसी को साथ रखें — उस दिन ख़ुद गाड़ी नहीं चला सकते।
हर सर्जरी पर लागू
डॉक्टर को क्या ज़रूर बताएँ
सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर को हर उस चीज़ की जानकारी चाहिए जो आप ले रहे हैं — दवा, आयुर्वेदिक चूर्ण, विटामिन, घरेलू क़ाढ़ा, सब।
क्या करें: लोग अक्सर आयुर्वेदिक और घरेलू चीज़ों को 'दवा' नहीं मानते और बताना छोड़ देते हैं। यही सबसे बड़ी चूक है। डिब्बे साथ ले जाएँ या फ़ोन से फ़ोटो खींच लें — नाम याद रखने से बेहतर है।
व्यावहारिक तैयारी
छोटी-छोटी चीज़ें जो अस्पताल का दिन आसान बना देती हैं और जिन्हें आख़िरी वक़्त पर याद करना मुश्किल होता है।
क्या करें: भूखे रहने का समय अस्पताल जो बताए वही मानें — इंटरनेट का नहीं। नाख़ून काटकर नेल पॉलिश हटा दें (ऑक्सीजन नापने वाला यंत्र उँगली पर लगता है)। सारे गहने घर छोड़ें। ढीले कपड़े। दवाओं की सूची और पुरानी रिपोर्ट साथ। घर लौटने के बाद पहले हफ़्ते किसी का साथ तय कर लें। शौचालय तक का रास्ता साफ़ रखें, बिस्तर के पास पानी और ज़रूरी चीज़ें पहुँच में।

2सर्जरी के बाद

पहले दिनों और हफ़्तों में क्या उम्मीद रखें।

आँख मलना बिल्कुल नहीं। रात को दी गई ढाल (शील्ड) पहनकर सोएँ ताकि नींद में हाथ न लगे।
पहले हफ़्ते-दो हफ़्ते झुककर ज़मीन से कुछ उठाना, भारी वज़न उठाना और शौच में ज़ोर लगाना नहीं — तीनों आँख पर दबाव डालते हैं।
आँख में पानी न जाने दें। बाल किसी और से, पीछे झुककर धुलवाएँ। धूल, धुआँ और खाना बनाते समय का धुआँ टालें।
बूँदें ठीक उसी क्रम और समय पर डालें जो लिखा है, और दो अलग बूँदों के बीच पाँच मिनट का अंतर रखें।

3खानपान

मरम्मत का कच्चा माल — और इस सर्जरी में क्या अलग है।

इस सर्जरी में ख़ास
क़ब्ज़ यहाँ सबसे बड़ा छिपा ख़तरा है, क्योंकि ज़ोर लगाना मना है। रेशा, पानी और ज़रूरत हो तो मल नरम करने वाली दवा पहले दिन से।
दूसरी आँख के लिए: हरी पत्तेदार सब्ज़ी, गाजर, आँवला और धूप से बचाव।
हर सर्जरी पर लागू
मरम्मत के लिए प्रोटीन
घाव भरना असल में नया माँस बनाना है, और उसका कच्चा माल प्रोटीन है। सर्जरी के बाद शरीर को सामान्य से ज़्यादा चाहिए — ठीक उस समय जब भूख सबसे कम होती है।
क्या करें: हर भोजन में कुछ: दाल, राजमा, चना, दही, पनीर, अंडा, मछली, चिकन का सूप, मूँग, सत्तू, दूध। शाकाहारी हों तो दाल+चावल साथ खाएँ, दोनों मिलकर पूरा प्रोटीन बनाते हैं। गुर्दे की बीमारी हो तो प्रोटीन बढ़ाने से पहले डॉक्टर से पूछें।
रेशा और पानी
दर्द की दवा, कम चलना-फिरना और बदला हुआ खाना — तीनों क़ब्ज़ की ओर धकेलते हैं। पेट की सर्जरी के बाद ज़ोर लगाना सबसे ज़्यादा नुक़सान करता है।
क्या करें: दिन भर पानी — एक साथ नहीं, थोड़ा-थोड़ा। रात भीगे अंजीर, किशमिश, मुनक्का। पपीता, अमरूद, सेब छिलके सहित। ईसबगोल पूरे गिलास पानी के साथ, कम पानी के साथ यह उल्टा असर करता है। रेशा धीरे-धीरे बढ़ाएँ, वरना गैस बढ़ती है।
थोड़ा-थोड़ा, बार-बार
एक भरी थाली सामने आते ही मन भर जाता है और कुछ नहीं खाया जाता। छह छोटी प्लेटों से दिन भर में कहीं ज़्यादा पेट में जाता है।
क्या करें: हर दो-तीन घंटे में कुछ। हर बार प्रोटीन का एक हिस्सा। तरल भी गिना जाए — दाल का पानी, सूप, छाछ, दूध, सत्तू का घोल। जब खाना मुश्किल हो, पीने वाली चीज़ें सबसे आसान रास्ता हैं।

4दवाओं के असर

बेहोशी, दर्द की दवा और एंटीबायोटिक के बाद जो होता है।

एंटीबायोटिक से दस्त
एंटीबायोटिक हानिकारक कीटाणुओं के साथ आँत के काम के जीवाणु भी साफ़ कर देती है, इसलिए कोर्स के दिनों में पतले दस्त आम हैं।
क्या करें: खाने के साथ दही या छाछ — पर एंटीबायोटिक की गोली से दो घंटे का अंतर रखें। चावल का माँड़, केला, खिचड़ी। पानी की कमी न होने दें, ज़रूरत हो तो ओआरएस। कोर्स अपने मन से बीच में न रोकें। दस्त पानी जैसे हों, साथ बुख़ार या ख़ून हो — तो यह घरेलू बात नहीं, डॉक्टर को दिखाएँ।
दवाओं के बाद भूख न लगना
बेहोशी, दर्द की दवा और एंटीबायोटिक मिलकर एक-दो हफ़्ते भूख दबा देते हैं। ठीक उसी समय शरीर को मरम्मत के लिए सबसे ज़्यादा खाने की ज़रूरत होती है।
क्या करें: एक बार में कम, पर दिन में छह बार। हर बार कुछ प्रोटीन — दाल, दही, पनीर, अंडा, सत्तू। खाने से पहले जीरा या अजवाइन का पानी। खट्टा स्वाद भूख खोलता है — नींबू, आँवला, अनार। ज़बरदस्ती एक बड़ी थाली से छह छोटी प्लेटें बेहतर हैं।

5शरीर में बदलाव

त्वचा, बाल और वे बदलाव जिनकी कोई चेतावनी नहीं देता।

त्वचा का सूखना
अस्पताल की हवा, बार-बार एंटीसेप्टिक से धुलाई और कम पानी पीना — तीनों मिलकर त्वचा सुखा देते हैं।
क्या करें: नहाने के तुरंत बाद, गीली त्वचा पर सादा तेल। पानी बढ़ाएँ। बहुत गर्म पानी से न नहाएँ। घाव और टाँकों पर तेल तभी जब डॉक्टर कहे।
इन पर घरेलू उपाय नहीं, डॉक्टर

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