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टॉन्सिल की सर्जरी

बच्चों में ज़्यादा — जहाँ पानी पीते रहना ही असली इलाज है

सबसे पहलेअस्पताल का डिस्चार्ज काग़ज़ और आपके सर्जन के निर्देश इस पन्ने से ऊपर हैं। यहाँ खानपान, आराम, दवाओं के असर और चेतावनी के लक्षण दिए गए हैं — घाव की पट्टी, वज़न उठाने की हद और काम पर लौटने का समय हर सर्जरी और हर सर्जन में अलग होता है, वह उन्हीं से पूछें।

1सर्जरी से पहले

जो तैयारी नतीजा बदल देती है।

इस सर्जरी में ख़ास
बच्चे को सच बताएँ कि गला कुछ दिन दुखेगा — तैयार बच्चा कम घबराता है और ज़्यादा पीता है।
घर में ठंडी चीज़ें पहले से रख लें: आइसक्रीम, कुल्फ़ी, दही, ठंडा दूध, जेली।
हर सर्जरी पर लागू
डॉक्टर को क्या ज़रूर बताएँ
सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर को हर उस चीज़ की जानकारी चाहिए जो आप ले रहे हैं — दवा, आयुर्वेदिक चूर्ण, विटामिन, घरेलू क़ाढ़ा, सब।
क्या करें: लोग अक्सर आयुर्वेदिक और घरेलू चीज़ों को 'दवा' नहीं मानते और बताना छोड़ देते हैं। यही सबसे बड़ी चूक है। डिब्बे साथ ले जाएँ या फ़ोन से फ़ोटो खींच लें — नाम याद रखने से बेहतर है।
व्यावहारिक तैयारी
छोटी-छोटी चीज़ें जो अस्पताल का दिन आसान बना देती हैं और जिन्हें आख़िरी वक़्त पर याद करना मुश्किल होता है।
क्या करें: भूखे रहने का समय अस्पताल जो बताए वही मानें — इंटरनेट का नहीं। नाख़ून काटकर नेल पॉलिश हटा दें (ऑक्सीजन नापने वाला यंत्र उँगली पर लगता है)। सारे गहने घर छोड़ें। ढीले कपड़े। दवाओं की सूची और पुरानी रिपोर्ट साथ। घर लौटने के बाद पहले हफ़्ते किसी का साथ तय कर लें। शौचालय तक का रास्ता साफ़ रखें, बिस्तर के पास पानी और ज़रूरी चीज़ें पहुँच में।

2सर्जरी के बाद

पहले दिनों और हफ़्तों में क्या उम्मीद रखें।

दर्द चौथे से सातवें दिन सबसे ज़्यादा होता है, शुरू में नहीं। यह जानकर लोग कम घबराते हैं।
गले में सफ़ेद-पीली परत बनना सामान्य है — यह मवाद नहीं, भरता हुआ घाव है।
दर्द की दवा समय पर लें, दर्द होने का इंतज़ार न करें — दर्द कम रहेगा तो पीना-खाना चलता रहेगा, और यही सबसे ज़रूरी है।
खुरदुरा और नुकीला खाना दो हफ़्ते नहीं — नमकीन, चिप्स, टोस्ट।

3खानपान

मरम्मत का कच्चा माल — और इस सर्जरी में क्या अलग है।

इस सर्जरी में ख़ास
पानी और तरल सबसे ज़रूरी — ठंडा दूध, छाछ, नारियल पानी, सूप। पेशाब का रंग हल्का रहे तो पानी पूरा है।
ठंडी और नरम चीज़ें गले को सुन्न करके दर्द घटाती हैं।
खट्टे रस — संतरा, नींबू — शुरू में जलन करते हैं।
हर सर्जरी पर लागू
मरम्मत के लिए प्रोटीन
घाव भरना असल में नया माँस बनाना है, और उसका कच्चा माल प्रोटीन है। सर्जरी के बाद शरीर को सामान्य से ज़्यादा चाहिए — ठीक उस समय जब भूख सबसे कम होती है।
क्या करें: हर भोजन में कुछ: दाल, राजमा, चना, दही, पनीर, अंडा, मछली, चिकन का सूप, मूँग, सत्तू, दूध। शाकाहारी हों तो दाल+चावल साथ खाएँ, दोनों मिलकर पूरा प्रोटीन बनाते हैं। गुर्दे की बीमारी हो तो प्रोटीन बढ़ाने से पहले डॉक्टर से पूछें।
ख़ून बनाने के लिए लोहा
हर सर्जरी में कुछ ख़ून जाता है। उसे वापस बनाने के लिए लोहा चाहिए, और लोहे को सोखने के लिए विटामिन सी।
क्या करें: हरी पत्तेदार सब्ज़ी, चुकंदर, अनार, खजूर, गुड़, तिल, राजमा। साथ में खट्टा — नींबू, आँवला, संतरा — इससे लोहा कई गुना ज़्यादा सोखा जाता है। खाने के तुरंत बाद चाय न पिएँ, वह लोहे को रोकती है; एक घंटे का अंतर रखें।
रेशा और पानी
दर्द की दवा, कम चलना-फिरना और बदला हुआ खाना — तीनों क़ब्ज़ की ओर धकेलते हैं। पेट की सर्जरी के बाद ज़ोर लगाना सबसे ज़्यादा नुक़सान करता है।
क्या करें: दिन भर पानी — एक साथ नहीं, थोड़ा-थोड़ा। रात भीगे अंजीर, किशमिश, मुनक्का। पपीता, अमरूद, सेब छिलके सहित। ईसबगोल पूरे गिलास पानी के साथ, कम पानी के साथ यह उल्टा असर करता है। रेशा धीरे-धीरे बढ़ाएँ, वरना गैस बढ़ती है।
थोड़ा-थोड़ा, बार-बार
एक भरी थाली सामने आते ही मन भर जाता है और कुछ नहीं खाया जाता। छह छोटी प्लेटों से दिन भर में कहीं ज़्यादा पेट में जाता है।
क्या करें: हर दो-तीन घंटे में कुछ। हर बार प्रोटीन का एक हिस्सा। तरल भी गिना जाए — दाल का पानी, सूप, छाछ, दूध, सत्तू का घोल। जब खाना मुश्किल हो, पीने वाली चीज़ें सबसे आसान रास्ता हैं।
क्या टालें
कुछ चीज़ें भरते हुए घाव और लौटती पाचन-शक्ति दोनों के ख़िलाफ़ काम करती हैं।
क्या करें: बहुत तला और बहुत मसालेदार — पहले हफ़्तों में पेट इन्हें नहीं सँभाल पाता। शराब — यह घाव भरना धीमा करती है और दर्द की दवा के साथ ख़तरनाक है। धूम्रपान — यह घाव तक ऑक्सीजन पहुँचना कम करता है, और सर्जरी के बाद घाव बिगड़ने का यह सबसे बड़ा टालने लायक़ कारण है। बाहर का कटा-खुला खाना, जब तक ताक़त लौट न आए।

4दवाओं के असर

बेहोशी, दर्द की दवा और एंटीबायोटिक के बाद जो होता है।

दर्द की दवा से क़ब्ज़
ट्रामाडोल, कोडीन या मॉर्फ़ीन जैसी तेज़ दर्द-निवारक आँतों की चाल धीमी कर देती हैं। सर्जरी के बाद यह लगभग सबके साथ होता है — यह किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं।
क्या करें: दिन भर घूँट-घूँट पानी। रात भीगी किशमिश, अंजीर या मुनक्का। सुबह ख़ाली पेट गुनगुना पानी। ईसबगोल पूरे गिलास पानी के साथ। और जैसे ही इजाज़त मिले, चलना शुरू करें — हिलना-डुलना आँत को सबसे तेज़ जगाता है। मल नरम करने वाली दवा के लिए डॉक्टर से पहले ही पूछ लें, क़ब्ज़ जमने के बाद नहीं।
एंटीबायोटिक से दस्त
एंटीबायोटिक हानिकारक कीटाणुओं के साथ आँत के काम के जीवाणु भी साफ़ कर देती है, इसलिए कोर्स के दिनों में पतले दस्त आम हैं।
क्या करें: खाने के साथ दही या छाछ — पर एंटीबायोटिक की गोली से दो घंटे का अंतर रखें। चावल का माँड़, केला, खिचड़ी। पानी की कमी न होने दें, ज़रूरत हो तो ओआरएस। कोर्स अपने मन से बीच में न रोकें। दस्त पानी जैसे हों, साथ बुख़ार या ख़ून हो — तो यह घरेलू बात नहीं, डॉक्टर को दिखाएँ।
बेहोशी के बाद जी मिचलाना
जनरल एनेस्थीसिया के बाद पहले एक-दो दिन उलटी जैसा लगना बहुत आम है।
क्या करें: गिलास भर नहीं, घूँट-घूँट। सूखी रोटी, खिचड़ी, सादा चावल। इजाज़त मिलने पर अदरक का टुकड़ा या गुनगुने पानी में सोंठ। एक दिन तली और तेज़ गंध वाली चीज़ों से दूर रहें। उलटी बार-बार हो और पानी भी न टिके तो डॉक्टर को बताएँ।
दवाओं के बाद भूख न लगना
बेहोशी, दर्द की दवा और एंटीबायोटिक मिलकर एक-दो हफ़्ते भूख दबा देते हैं। ठीक उसी समय शरीर को मरम्मत के लिए सबसे ज़्यादा खाने की ज़रूरत होती है।
क्या करें: एक बार में कम, पर दिन में छह बार। हर बार कुछ प्रोटीन — दाल, दही, पनीर, अंडा, सत्तू। खाने से पहले जीरा या अजवाइन का पानी। खट्टा स्वाद भूख खोलता है — नींबू, आँवला, अनार। ज़बरदस्ती एक बड़ी थाली से छह छोटी प्लेटें बेहतर हैं।

5शरीर में बदलाव

त्वचा, बाल और वे बदलाव जिनकी कोई चेतावनी नहीं देता।

हफ़्तों तक रहने वाली कमज़ोरी
छोटी सी सर्जरी भी कई हफ़्तों की ताक़त ले जाती है। लोग अक्सर उम्मीद करते हैं कि टाँके कटते ही पहले जैसे हो जाएँगे, और फिर घबरा जाते हैं।
क्या करें: हर भोजन में प्रोटीन। ख़ून की कमी की जाँच। रोज़ थोड़ी धूप। चलना छोटा शुरू करें और हर हफ़्ते थोड़ा बढ़ाएँ — रोज़ नहीं, हफ़्ते के हिसाब से। जिस दिन ज़्यादा थकें, अगले दिन कम करें, बंद न करें।
इन पर घरेलू उपाय नहीं, डॉक्टर

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