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हर्निया की सर्जरी

जाली (मेश) लगाकर — पेट, नाभि या जाँघ की गाँठ

सबसे पहलेअस्पताल का डिस्चार्ज काग़ज़ और आपके सर्जन के निर्देश इस पन्ने से ऊपर हैं। यहाँ खानपान, आराम, दवाओं के असर और चेतावनी के लक्षण दिए गए हैं — घाव की पट्टी, वज़न उठाने की हद और काम पर लौटने का समय हर सर्जरी और हर सर्जन में अलग होता है, वह उन्हीं से पूछें।

1सर्जरी से पहले

जो तैयारी नतीजा बदल देती है।

इस सर्जरी में ख़ास
क़ब्ज़, पुरानी खाँसी और वज़न — तीनों हर्निया दोबारा होने की वजह बनते हैं। सर्जरी से पहले जितना ठीक कर लें, उतना अच्छा।
धूम्रपान से खाँसी आती है और खाँसी जाली पर ज़ोर डालती है — छोड़ने का यह सबसे ज़रूरी मौक़ा है।
हर सर्जरी पर लागू
कौन-सी चीज़ें पहले बंद करनी हैं
लहसुन, अदरक, हल्दी की गोलियाँ, अश्वगंधा, मेथी, गिंग्को, मछली का तेल, विटामिन ई — इनमें से कई ख़ून पतला करते हैं और ऑपरेशन में रक्तस्राव बढ़ा सकते हैं।
क्या करें: पूरी सूची और कब बंद करना है, यह अलग पन्ने पर है। सामान्य नियम: सर्जरी से दो हफ़्ते पहले तक अपने डॉक्टर से हर चीज़ की पुष्टि कर लें। रसोई में सामान्य मात्रा में इस्तेमाल अलग बात है, गोली या सत्व के रूप में लेना अलग।
डॉक्टर को क्या ज़रूर बताएँ
सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर को हर उस चीज़ की जानकारी चाहिए जो आप ले रहे हैं — दवा, आयुर्वेदिक चूर्ण, विटामिन, घरेलू क़ाढ़ा, सब।
क्या करें: लोग अक्सर आयुर्वेदिक और घरेलू चीज़ों को 'दवा' नहीं मानते और बताना छोड़ देते हैं। यही सबसे बड़ी चूक है। डिब्बे साथ ले जाएँ या फ़ोन से फ़ोटो खींच लें — नाम याद रखने से बेहतर है।
धूम्रपान बंद करना
सर्जरी से पहले धूम्रपान छोड़ना घाव बिगड़ने, छाती में संक्रमण और ठीक होने में देर — तीनों का ख़तरा घटाता है। चार हफ़्ते पहले छोड़ने से सबसे ज़्यादा फ़ायदा है, पर कुछ दिन भी बेकार नहीं जाते।
क्या करें: जिस दिन तारीख़ मिले उसी दिन से छोड़ दें। तंबाकू, गुटखा और बीड़ी सब इसमें शामिल हैं। छोड़ने में मदद चाहिए तो डॉक्टर से माँगें — सर्जरी की तारीख़ इसका सबसे अच्छा मौक़ा है।
पहले से ताक़त बनाना
जो लोग सर्जरी में ज़्यादा ताक़त और बेहतर पोषण लेकर जाते हैं, वे तेज़ी से लौटते हैं। यह मौक़ा इंतज़ार के हफ़्तों में होता है और अक्सर गँवा दिया जाता है।
क्या करें: रोज़ चलना, जितना सह सकें। गहरी साँस का अभ्यास अभी से शुरू करें — बाद में यह आसान लगेगा। हर भोजन में प्रोटीन। ख़ून की कमी हो तो पहले ही ठीक करवाएँ। शुगर हो तो उसे क़ाबू में लाएँ — बेक़ाबू शुगर घाव भरने की सबसे बड़ी रुकावट है।
व्यावहारिक तैयारी
छोटी-छोटी चीज़ें जो अस्पताल का दिन आसान बना देती हैं और जिन्हें आख़िरी वक़्त पर याद करना मुश्किल होता है।
क्या करें: भूखे रहने का समय अस्पताल जो बताए वही मानें — इंटरनेट का नहीं। नाख़ून काटकर नेल पॉलिश हटा दें (ऑक्सीजन नापने वाला यंत्र उँगली पर लगता है)। सारे गहने घर छोड़ें। ढीले कपड़े। दवाओं की सूची और पुरानी रिपोर्ट साथ। घर लौटने के बाद पहले हफ़्ते किसी का साथ तय कर लें। शौचालय तक का रास्ता साफ़ रखें, बिस्तर के पास पानी और ज़रूरी चीज़ें पहुँच में।

2सर्जरी के बाद

पहले दिनों और हफ़्तों में क्या उम्मीद रखें।

जाली को जमने में हफ़्ते लगते हैं। इस दौरान ज़ोर लगाना — वज़न उठाना, ज़ोर से खाँसना, शौच में ताक़त लगाना — सबसे बड़ा ख़तरा है।
वज़न उठाने की हद और कब से काम पर लौटना है, यह हर सर्जन अलग बताता है। अपने डिस्चार्ज पेपर की हद मानें, इंटरनेट की नहीं।
जाँघ के हर्निया के बाद अंडकोष या जाँघ में सूजन और नीलापन आम है, दो-तीन हफ़्ते में उतरता है।

3खानपान

मरम्मत का कच्चा माल — और इस सर्जरी में क्या अलग है।

इस सर्जरी में ख़ास
क़ब्ज़ यहाँ सिर्फ़ तकलीफ़ नहीं, जाली के लिए ख़तरा है। रेशा, पानी और ज़रूरत हो तो मल नरम करने वाली दवा — पहले दिन से।
गैस बढ़ाने वाली चीज़ें शुरू में कम — राजमा, छोले, गोभी।
हर सर्जरी पर लागू
मरम्मत के लिए प्रोटीन
घाव भरना असल में नया माँस बनाना है, और उसका कच्चा माल प्रोटीन है। सर्जरी के बाद शरीर को सामान्य से ज़्यादा चाहिए — ठीक उस समय जब भूख सबसे कम होती है।
क्या करें: हर भोजन में कुछ: दाल, राजमा, चना, दही, पनीर, अंडा, मछली, चिकन का सूप, मूँग, सत्तू, दूध। शाकाहारी हों तो दाल+चावल साथ खाएँ, दोनों मिलकर पूरा प्रोटीन बनाते हैं। गुर्दे की बीमारी हो तो प्रोटीन बढ़ाने से पहले डॉक्टर से पूछें।
ख़ून बनाने के लिए लोहा
हर सर्जरी में कुछ ख़ून जाता है। उसे वापस बनाने के लिए लोहा चाहिए, और लोहे को सोखने के लिए विटामिन सी।
क्या करें: हरी पत्तेदार सब्ज़ी, चुकंदर, अनार, खजूर, गुड़, तिल, राजमा। साथ में खट्टा — नींबू, आँवला, संतरा — इससे लोहा कई गुना ज़्यादा सोखा जाता है। खाने के तुरंत बाद चाय न पिएँ, वह लोहे को रोकती है; एक घंटे का अंतर रखें।
रेशा और पानी
दर्द की दवा, कम चलना-फिरना और बदला हुआ खाना — तीनों क़ब्ज़ की ओर धकेलते हैं। पेट की सर्जरी के बाद ज़ोर लगाना सबसे ज़्यादा नुक़सान करता है।
क्या करें: दिन भर पानी — एक साथ नहीं, थोड़ा-थोड़ा। रात भीगे अंजीर, किशमिश, मुनक्का। पपीता, अमरूद, सेब छिलके सहित। ईसबगोल पूरे गिलास पानी के साथ, कम पानी के साथ यह उल्टा असर करता है। रेशा धीरे-धीरे बढ़ाएँ, वरना गैस बढ़ती है।
थोड़ा-थोड़ा, बार-बार
एक भरी थाली सामने आते ही मन भर जाता है और कुछ नहीं खाया जाता। छह छोटी प्लेटों से दिन भर में कहीं ज़्यादा पेट में जाता है।
क्या करें: हर दो-तीन घंटे में कुछ। हर बार प्रोटीन का एक हिस्सा। तरल भी गिना जाए — दाल का पानी, सूप, छाछ, दूध, सत्तू का घोल। जब खाना मुश्किल हो, पीने वाली चीज़ें सबसे आसान रास्ता हैं।
क्या टालें
कुछ चीज़ें भरते हुए घाव और लौटती पाचन-शक्ति दोनों के ख़िलाफ़ काम करती हैं।
क्या करें: बहुत तला और बहुत मसालेदार — पहले हफ़्तों में पेट इन्हें नहीं सँभाल पाता। शराब — यह घाव भरना धीमा करती है और दर्द की दवा के साथ ख़तरनाक है। धूम्रपान — यह घाव तक ऑक्सीजन पहुँचना कम करता है, और सर्जरी के बाद घाव बिगड़ने का यह सबसे बड़ा टालने लायक़ कारण है। बाहर का कटा-खुला खाना, जब तक ताक़त लौट न आए।

4दवाओं के असर

बेहोशी, दर्द की दवा और एंटीबायोटिक के बाद जो होता है।

दर्द की दवा से क़ब्ज़
ट्रामाडोल, कोडीन या मॉर्फ़ीन जैसी तेज़ दर्द-निवारक आँतों की चाल धीमी कर देती हैं। सर्जरी के बाद यह लगभग सबके साथ होता है — यह किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं।
क्या करें: दिन भर घूँट-घूँट पानी। रात भीगी किशमिश, अंजीर या मुनक्का। सुबह ख़ाली पेट गुनगुना पानी। ईसबगोल पूरे गिलास पानी के साथ। और जैसे ही इजाज़त मिले, चलना शुरू करें — हिलना-डुलना आँत को सबसे तेज़ जगाता है। मल नरम करने वाली दवा के लिए डॉक्टर से पहले ही पूछ लें, क़ब्ज़ जमने के बाद नहीं।
एंटीबायोटिक से दस्त
एंटीबायोटिक हानिकारक कीटाणुओं के साथ आँत के काम के जीवाणु भी साफ़ कर देती है, इसलिए कोर्स के दिनों में पतले दस्त आम हैं।
क्या करें: खाने के साथ दही या छाछ — पर एंटीबायोटिक की गोली से दो घंटे का अंतर रखें। चावल का माँड़, केला, खिचड़ी। पानी की कमी न होने दें, ज़रूरत हो तो ओआरएस। कोर्स अपने मन से बीच में न रोकें। दस्त पानी जैसे हों, साथ बुख़ार या ख़ून हो — तो यह घरेलू बात नहीं, डॉक्टर को दिखाएँ।
बेहोशी के बाद जी मिचलाना
जनरल एनेस्थीसिया के बाद पहले एक-दो दिन उलटी जैसा लगना बहुत आम है।
क्या करें: गिलास भर नहीं, घूँट-घूँट। सूखी रोटी, खिचड़ी, सादा चावल। इजाज़त मिलने पर अदरक का टुकड़ा या गुनगुने पानी में सोंठ। एक दिन तली और तेज़ गंध वाली चीज़ों से दूर रहें। उलटी बार-बार हो और पानी भी न टिके तो डॉक्टर को बताएँ।
गले में खराश व आवाज़ बैठना
बेहोशी के दौरान साँस की नली डाली जाती है। उससे कुछ दिन गला ख़राब रहता है और आवाज़ बैठ जाती है — यह अपने आप ठीक होता है।
क्या करें: इजाज़त मिलने पर गुनगुने नमक-पानी के गरारे। गर्म तरल — सूप, हल्दी वाला दूध। गुनगुने पानी में शहद (एक साल से छोटे बच्चे को नहीं)। आवाज़ को आराम दें, फुसफुसाएँ नहीं — फुसफुसाना गले पर ज़्यादा ज़ोर डालता है।
दवाओं के बाद भूख न लगना
बेहोशी, दर्द की दवा और एंटीबायोटिक मिलकर एक-दो हफ़्ते भूख दबा देते हैं। ठीक उसी समय शरीर को मरम्मत के लिए सबसे ज़्यादा खाने की ज़रूरत होती है।
क्या करें: एक बार में कम, पर दिन में छह बार। हर बार कुछ प्रोटीन — दाल, दही, पनीर, अंडा, सत्तू। खाने से पहले जीरा या अजवाइन का पानी। खट्टा स्वाद भूख खोलता है — नींबू, आँवला, अनार। ज़बरदस्ती एक बड़ी थाली से छह छोटी प्लेटें बेहतर हैं।

5शरीर में बदलाव

त्वचा, बाल और वे बदलाव जिनकी कोई चेतावनी नहीं देता।

दो-तीन महीने बाद बाल झड़ना
बड़ी सर्जरी, ख़ून की कमी और बेहोशी का तनाव बहुत सारे बालों को एक साथ आराम की अवस्था में धकेल देते हैं। वे दो-तीन महीने बाद मुट्ठी भर-भर कर गिरते हैं। यह डरावना लगता है और लगभग हमेशा अस्थायी होता है — छह से नौ महीने में बाल वापस आ जाते हैं।
क्या करें: हर भोजन में प्रोटीन और लोहा। हीमोग्लोबिन की जाँच करवा लें, कमी अक्सर यहीं पकड़ी जाती है। बाल धीरे सँभालें, कसकर न बाँधें, गर्म ड्रायर से बचें। कोई तेज़ इलाज शुरू न करें — बाल बीमार नहीं हैं, उन्हें सिर्फ़ समय चाहिए।
निशान की देखभाल
निशान पहले लाल और सख़्त होता है, फिर धीरे-धीरे हल्का पड़ता है। इसमें महीनों लगते हैं, कई बार साल भर।
क्या करें: घाव पूरी तरह भर जाने और डॉक्टर की इजाज़त के बाद ही — रोज़ कुछ मिनट सादे तेल (नारियल या तिल) से हल्की मालिश। निशान को धूप से बचाएँ या ढककर रखें, धूप उसे गहरा कर देती है। ताज़े या खुले घाव पर हल्दी, राख या कोई भी पाउडर न लगाएँ — यह संक्रमण का सीधा रास्ता है।
पट्टी व टेप से त्वचा पर चकत्ते
सर्जरी की टेप और चिपकने वाली पट्टी अक्सर त्वचा पर खुजली वाला लाल चौकोर निशान छोड़ जाती है।
क्या करें: नर्स या डॉक्टर को बताएँ ताकि अगली बार दूसरी तरह की पट्टी लगे। जगह को सूखा रखें। त्वचा जुड़ जाने के बाद सादा नारियल तेल। खुजाएँ नहीं — खुजाया हुआ चकत्ता संक्रमित हो सकता है। फफोले पड़ें या मवाद दिखे तो दिखाएँ।
हफ़्तों तक रहने वाली कमज़ोरी
छोटी सी सर्जरी भी कई हफ़्तों की ताक़त ले जाती है। लोग अक्सर उम्मीद करते हैं कि टाँके कटते ही पहले जैसे हो जाएँगे, और फिर घबरा जाते हैं।
क्या करें: हर भोजन में प्रोटीन। ख़ून की कमी की जाँच। रोज़ थोड़ी धूप। चलना छोटा शुरू करें और हर हफ़्ते थोड़ा बढ़ाएँ — रोज़ नहीं, हफ़्ते के हिसाब से। जिस दिन ज़्यादा थकें, अगले दिन कम करें, बंद न करें।
सूजन जो शाम को बढ़े
ऑपरेशन की जगह और उससे नीचे के हिस्से में हफ़्तों तक सूजन रहना सामान्य है। वह सुबह कम और शाम तक ज़्यादा होती है।
क्या करें: जितना हो सके उस हिस्से को दिल की ऊँचाई से ऊपर रखें। टख़ना ऊपर-नीचे चलाते रहें। नमक सीमित रखें। पर ध्यान रहे — एक ही पिंडली में सूजन के साथ दर्द और गर्माहट ख़ून के थक्के का संकेत है; उसे न दबाएँ, न सेंकें, सीधे डॉक्टर के पास जाएँ।

6आराम के दिन

लेटे रहने के अपने ख़तरे हैं — ये उन्हें रोकते हैं।

टख़ना चलाते रहें — थक्का रोकने के लिए
लेटे रहने पर टाँगों की नसों में ख़ून धीमा चलता है और थक्का बनने का ख़तरा बढ़ता है। सर्जरी के बाद यह ख़तरा पहले से ही ज़्यादा होता है।
क्या करें: जागते हुए हर घंटे: दोनों पंजे अपनी ओर खींचें और दूर तानें, 20 बार। घुटने के नीचे तकिया लगातार न रखें। जब भी इजाज़त हो, बिस्तर से उतरकर कुछ क़दम चलें — यह हर दवा से ज़्यादा असरदार है। दबाव वाले मोज़े दिए गए हों तो पहने रहें।
गहरी साँस — छाती के संक्रमण से बचने के लिए
बेहोशी और दर्द के कारण साँस उथली हो जाती है, फेफड़ों के निचले हिस्से पूरे नहीं खुलते, और वहाँ संक्रमण बैठ जाता है। पेट या छाती की सर्जरी के बाद यह ख़तरा सबसे ज़्यादा है।
क्या करें: हर घंटे दस गहरी साँस — नाक से भरें, दो पल रोकें, मुँह से धीरे छोड़ें। फिर एक 'हुफ़' — मुँह खोलकर तेज़ी से हवा बाहर, खाँसी नहीं। खाँसते या हुफ़ करते समय घाव पर तकिया दबाकर रखें, इससे दर्द बहुत कम होता है। स्पाइरोमीटर (साँस वाला यंत्र) मिला हो तो जितना कहा गया है उतना करें।
लेटे रहने से क़ब्ज़
हिलना-डुलना बंद होते ही आँत सुस्त हो जाती है। दर्द की दवा साथ हो तो और भी।
क्या करें: पानी दिन भर। रात भीगे अंजीर या किशमिश। सुबह गुनगुना पानी। जितना हो सके बिस्तर पर बैठकर खाएँ, लेटकर नहीं। शौच रोकें नहीं और ज़ोर न लगाएँ — ज़ोर लगाना पेट के टाँकों पर सबसे बुरा असर डालता है। तीन दिन से ज़्यादा हो जाए तो डॉक्टर को बताएँ।
इन पर घरेलू उपाय नहीं, डॉक्टर

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